यह आकर्षक फल कठोर लाल छिलके वाला फल है जिसके अंदर पीली, कड़वी तथा खाई न जा सकने वाली झिल्लियों में गुलाबी गूदे वाले पारदर्शी दाने होते हैं जिनमें खाने योग्य सफेद बीज होते हैं। इसकी झिल्ली बाहरी छिलके तक फैली होती हैं। इस फल के नाम का अर्थ है ‘पिम्पल्स वाला सेब’। इस फल का सेवन थोड़ा जटिल है क्योंकि प्रत्येक दाने को अलग-अलग करना पड़ता है परन्तु यह प्रयास काफी मूल्यवान है क्योंकि इसका स्वाद काफी जूसी, रिफ्रैशिंग तथा हल्का-सा खटास भरा होता है। अनार के जूस से पडऩे वाले धब्बे आसानी से जाते नहीं हैं।
पोषक मूल्य
यह फल असंख्य बीजों वाली एक बेरी है। इसका छिलका मोटा होता है जिसका रंग पीले से लाल तक हो सकता है। इस फल के बीजों का प्रयोग प्राचीन काल से टैनिया जैसे परजीवियों को शरीर से बाहर निकालने के लिए किया जाता है। यह हृदय को उत्तेजित करता है और डायरिया से आराम पहुंचाता है।
पोषक तथ्य
इसमें विटामिन सी, प्रोटीन्स, फासफोरस, क्लोरीन, सोडियम, मैग्रीशियम तथा कैल्शियम भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। इसमें मैलिक एसिड तथा पिग्मैंट्स भी मौजूद होते हैं।
लाभ
अनार का सत्व एक शक्तिशाली डिसइन्फैक्टैंट लिक्विड के तौर पर कार्य करता है।
डाइयूरैटिक (मूत्रवर्धक) सिरप: 5 दिनों के दौरान 30 डिग्री तापमान में 300 घन सैंटीमीटर अल्कोहल में 100 ग्राम अनार के गूदे को गलाएं। 1/3 किलोग्राम चीनी को 165 घन सैंटीमीटर पानी में तब तक उबालें जब तक कि यह एक सिरप न बन जाए। इसे मिश्रित करें और दो दिन के लिए छोड़ दें। फिल्टर करके प्रतिदिन 2 या 3 बार एक-एक चम्मच पिएं।
पेट दर्द या पेट के संक्रमणों के लिए अनार के 20 ग्राम छिलके को 2 कप पानी में पकाएं फिर इसमें एक चम्मच अलसी मिलाएं। इस मिश्रण को 10 मिनट तक उबलने दें। प्रतिदिन तीन खुराक के हिसाब से इसे पीएं। मोतियाबिंद तथा आंखों के अन्य रोगों से पीडि़त व्यक्तियों के लिए ताजा अनार का जूस बहुत लाभदायक सिद्ध होता है।
इंटेस्टाइनल टैनिया अनार की जड़ की बाहरी परत बहुत लाभदायक सिद्ध होती है। 100 जड़ की बाहरी परत को एक लीटर पानी में तब तक पकाएं जब तक कि यह 1/4 लीटर न रह जाए। इसका सेवन प्रत्येक आधे घंटे के बीद तीन अलग-अलग खुराकों में किया जा सकता है।