छत्तीसगढ़ विधानसभा का पहला सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित

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Wednesday, February 26, 2014-12:36 PM

रायपुर: छत्तीसगढ़ की चतुर्थ विधानसभा का पहला सत्र कल अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया। विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल ने बजट सत्र के समाप्ति की घोषणा करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य की चतुर्थ विधानसभा के प्रथम सत्र का कल अंतिम दिवस है। विधानसभा का वर्तमान सत्र दिनांक छह जनवरी से नवनिर्वाचित सदस्यों को शपथ दिलाने और राज्यपाल के सम्बोधन के लिए आरंभ हुआ था। बाद में सभा के द्वारा लिए गए निर्णय के अनुरूप इस महीने की तीन तारीख से सत्र की बैठकें हुईं, जिसमें शासन ने वित्तीय वर्ष 2014-15 के लिए आय-व्यय अनुमान प्रस्तुत किया।

 

इस दौरान सदस्यों ने छत्तीसगढ़ विधानसभा प्रक्रिया एवं कार्य संचालन संबंधी नियमावली के अंतर्गत प्रश्न, ध्यानाकर्षण और अन्य प्रक्रियाओं के माध्यम से शासन की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी रूप से सभा में चर्चा हेतु लोकहित के विषयों को रखा। अग्रवाल ने बताया कि इस सत्र में कुल 23 बैठकों में राज्यपाल के कृतज्ञता ज्ञापन प्रस्ताव पर 14 घंटे 10 मिनट चर्चा सहित कुल लगभग 134 घंटे 30 मिनट चर्चा हुई। 23 बैठकों में 183 प्रश्न पूछे गए, जिनके उत्तर शासन द्वारा दिए गए।

 

उन्होंने बताया कि सदस्यों द्वारा अशासकीय संकल्प की 13 सूचनाएं दी गईं, जिनमें छह संकल्प ग्राह्य हुये तथा दो संकल्प सदन में चर्चा उपरांत स्वीकृत हुए। इस सत्र में विनियोग विधेयक सहित आठ विधेयकों की सूचनाएं प्राप्त हुईं तथा सभी विधेयक चर्चा उपरांत पारित हुए। सिंह ने कहा कि उनकी सरकार का यह बजट निर्जीव वित्तीय आंकड़ों का मायाजाल नहीं है, बल्कि इसे मानवीय संवेदनाओं के दस्तावेज के रूप में देखा जाना चाहिए।

 

उन्होंने कहा कि नोबल पुरस्कार विजेता सुप्रसिद्ध अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन की पुस्तक ‘एन अनसर्टेन ग्लोरी’ में कुछ आंकड़ों के आधार पर यह उल्लेख किया गया है कि मानव विकास सूचकांक में छत्तीसगढ़ अन्य राज्यों की तुलना में काफी पिछड़ा हुआ है। अमर्त्य सेन द्वारा इस पुस्तक में दिए गए आंकड़े वर्ष 2005 के एक सर्वेक्षण पर आधारित है। वास्तव में इस प्रकार का पिछड़ापन राज्य गठन के समय छत्तीसगढ़ को विरासत में मिला था, लेकिन वर्ष 2004 से जब से भाजपा सरकार ने कार्यभार सम्हाला है, राज्य के पिछड़ेपन को दूर करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं और इसमें काफी समय और संसाधन लगा है।

 

रमन सिंह ने कहा कि राज्य में लगभग आधी आबादी महिलाओं का होना एक अच्छा संकेत है। राज्य के समग्र विकास में यहां महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। छत्तीसगढ़ लैंगिक अनुपात की दृष्टि से देश के पांच अग्रणी राज्य में शामिल हैं। यहां लैंगिक अनुपात 991 प्रति एक हजार पुरूष है। छत्तीसगढ़ में बालिका शिक्षा पर विशेष जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री के जवाब के बाद सदन में आगामी एक अप्रैल से शुरू हो रहे नए वित्तीय वर्ष 2014-15 के लिए राज्य सरकार का 57 हजार 149 करोड़ रुपए का बजट ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।


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