छोटे से जार में निकाला रजवाड़ों का लश्कर

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Thursday, February 27, 2014-12:56 AM
नई दिल्ली (अशोक चौधरी): राजस्थान में राजाओं की सवारी निकलते तो लोगों ने देखा होगा, लेकिन राजशाही लश्कर की सवारी किसी छोटे से जार में शायद ही किसी ने देखा होगा। राजस्थान के रजवाड़ों की सवारी ‘गणगौर’ को मेटल के छोटे फूल दान में उकेरा है जयपुर के शिल्पकार मोहम्मद बशीर ने। जिसमें लश्कर के साथ चलने वाले एक एक चीज को बड़े ही बारीकी से दिखाया गया, जिसकी कीमत 2500 रुपए हैं।
 
सोमवार से नई दिल्ली के भगवान दास रोड स्थित आगा खां हाल में चल रही राजस्थान के कारीगरों की प्रदर्शनी ‘शिल्प आंगन’ में इन दिनों यूं तो राजस्थान के शाही कला कृतियों के कई उत्पाद प्रदर्शति हो रहे हैं लेकिन मैटल से बना यह नायाब जार लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। कारीगर मोहम्मद बशीर ने बताया कि इसको बनाने में 3 से 5 दिन लग जाते हैं। वह कहते हैं कि इसमें इतना बारीक काम होता है कि 40 साल के बाद ऐसे काम के लिए नजर नहीं काम करती है। इसमें सूरज की रौशनी में ही नक्काशी हो पाती है, इसलिए 3 से 5 दिन लग जाता है। 
 
जार में नक्काशी के लिए मेरठ से रा मैटेरियल लाया जाता है जिसकी कीमत मात्र 500 रुपए होती है, लेकिन 3 से 5 दिन की कड़ी मेहनत के बाद इसकी कीमत 2500 रुपए हो जाती है। बशीर के अनुसार मांग के मुताबिक वे सप्लाई नहीं कर पाते हैं। मेटल के इस जार में लश्कर में चलने वाले 3 हाथी, 4 घोड़े, 8 ऊंट, पालकी में सवार राज कुमारियां, महारानियां और राजा के साथ चलने वाले सिपाही, कोचवान, मोर, नाचते गाते लोग तथा प्रजा को चलते दिखाया गया है। गणगौर यात्रा तीज के मौके पर राजाओं की शाही यात्रा के लिए निकलती थी। 

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