चुनावी सर्वे भ्रम फैलाने का मनोवैज्ञानिक कसरत: नीतीश

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Thursday, February 27, 2014-6:30 PM

पटना: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने चुनावी सर्वे को ‘पैसे के बल पर भ्रम फैलाने का मनोवैज्ञानिक कसरत’ करार देते हुए कहा कि इसके जरिये लोकतंत्र की जड़ों को खोखला करने का प्रयास किया जा रहा है लेकिन जब जनमत इसके खिलाफ तैयार होगा तो इसके पीछे की शक्तियां धराशायी हो जायेंगी। कुमार ने आज यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि एक निजी चैनल के ‘स्टिंग ऑपरेशन’ से उनकी पहले से ही कही जा रही यह बात साबित हो गयी कि चुनावी सर्वे प्रायोजित होता है और पैसे के बल पर कुछ लोग भ्रम फैलाने का मनोवैज्ञानिक कसरत करते हैं। उन्होंने कहा कि भारत जैसे जटिल समाज में छोटे सैम्पल के जरिये नतीजा निकालना बेमानी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज और कानून इसे देख रहा है और उन्हें उम्मीद है कि इस मामले में जरूर कदम उठाया जायेगा। उनसे जब यह पूछा गया कि क्या वह ऐसे सर्वे पर रोक लगाने के लिए पहल करेंगे तब उन्होंने कहा कि यदि वह ऐसा कोई कदम उठाते हैं तो यह कहा जायेगा कि सर्वे में उन्हें कम सीट दी गयी है इसलिए वह ऐसा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सच यह है कि पैसे के बल पर लोकतंत्र की जड़ों को खोखला करने का प्रयास किया जा रहा है । कुमार ने कहा कि आज कल लगता है कि पैसे के बल पर कुछ भी किया जा सकता है लेकिन जब इसके खिलाफ जनमत तैयार होगा तब इसके पीछे की शक्तियां धराशायी हो जायेंगी और जनता की प्रबल इच्छा की जीत होगी। उन्होंने कहा कि यदि चुनावी सर्वे इतना ही सही होते हैं तो चुनाव की क्या जरूरत है। बिना चुनाव के ही शपथ ले लेना चाहिए।


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