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आप को हो रहा है इस्तीफे की गलती का अहसास

  • आप को हो रहा है इस्तीफे की गलती का अहसास
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Friday, February 28, 2014-12:36 AM
नई दिल्ली,(अशोक शर्मा): दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को भ्रष्टाचार के खिलाफ आंख मूंदकर समर्थन देने वाला मध्यमवर्गीय मतदाताओं का अब पार्टी से मोहभंग होता दिख रहा है।
 
बेशक आप के नेता इस बात का खुलकर समर्थन करने से परहेज कर रहे हों लेकिन वे खुद इस बात को महसूस कर रहे हैं कि लोकसभा चुनाव में उन्हें दिल्ली से मिलने वाले मतों का प्रतिशत कम हो सकता है।
 
इसकी 2 वजहें मानी जा रही हैं। पहला आप के नेता अरविंद केजरीवाल को सरकार गठित करने के लिए किसी भी पार्टी का समर्थन नहीं लेना चाहिए था। दूसरा जब उन्होंने सारी कसमें तोड़कर सरकार का गठन कर ही लिया था, तो अपनी हठधर्मिता की वजह से मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देना चाहिए था। बेहतर होता केजरीवाल मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए आने वाले समय में विधानसभा चुनाव के दौरान जनता से किए गए वायदों को पूरा करते और उनकी उम्मीदों पर खरा उतरते, इस्तीफा देकर क्या फायदा हुआ?
 
सूत्रों की माने, तो मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने की पीछे केजरीवाल व कुछ अन्य नेताओं की सोच यह रही, कि यदि वह इस्तीफा नहीं देते तो उनका हाल भी पूर्व प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर, चौ.चरण सिंह और एच.डी. देवगौड़ा जैसा होता, इसीलिए इस्तीफा देने अलावा कोई चारा नहीं था लेकिन आप के नेताओं को जल्दबाजी में लिए गए उस कदम का अब अहसास हो रहा है। 
 
इस तरह की रायशुमारी दिल्ली के ही मतदाताओं की ही नहीं है बल्कि आम आदमी पार्टी के नेताओं को बाहरी राज्यों से भी इसी तरह के संकेत मिल रहे हैं कि केजरीवाल के इस कदम से मध्यम वर्ग के मतदाताओं का समर्थन कम होता दिख रहा है। इतना ही नहीं अपर-मिडिल क्लास के मतदाता भी खुद को एक तरीके से ठगा महसूस कर रहे हैं। उनकी दलील है कि एक तरफ तो केजरीवाल कांग्रेस और भाजपा के नेताओं पर भ्रष्ट होने का आरोप लगा रहे थे, तो फिर उन्होंने केवल सरकार बनाने के लिए आखिर किस आधार पर कांग्रेस से हाथ मिलाया और जब सरकार बना ही ली थी, तो उसे चलाकर जनता से किए गए वायदों को सबसे पहले पूरा करना चाहिए था। 

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