लोकसभा में पंजाब-हरियाणा के सांसद रहे ‘मौन’

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Saturday, March 01, 2014-3:49 PM

चंडीगढ़: चुनावी रैलियों में चिल्ला-चिल्लाकर जनता की आवाज बनने का दम भरने वाले नेता लोकसभा में पहुंचते ही ‘मौन’ धारण कर लेते हैं। संसद में विभिन्न नीतियों और फैसलों पर होने वाली बहसों के आंकड़ों पर अगर ध्यान दें तो कमोबेश जनप्रतिनिधियों की यही तस्वीर सामने आती है।

आंकड़े बताते हैं कि उत्तर भारत के पंजाब, हरियाणा केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के सांसद ज्यादातर समय संसद में चुप ही बैठे रहे तथा हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर के सांसदों ने बहस में बोलने में कोई भी कंजूसी नहीं बरती। हरियाणा से भिवानी-महेंद्रगढ़ क्षेत्र की कांग्रेसी सांसद श्रुति चौधरी ने 5 वर्षों के दौरान सबसे ज्यादा 24 बहसों में हिस्सा लिया। प्रदेश के बाकी सांसदों की बहसों में भागीदारी का आंकड़ा इससे कहीं कम है। कमोबेश यही स्थिति पंजाब के सांसदों के साथ भी है।

पंजाब में खडूर साहिब क्षेत्र से अकाली सांसद रतन सिंह अजनाला ने सबसे ज्यादा 41 बहसों में हिस्सा लिया। सूबे के बाकी सांसदों का आंकड़ा इससे नीचे ही रहा। चंडीगढ़ के सांसद पवन बंसल द्वारा की गई बहसों की संख्या शून्य है। वहीं, शत-प्रतिशत हाजिरी हासिल करने वाली मंडी की कांग्रेसी सांसद प्रतिभा सिंह ने सिर्फ 1 बहस में हिस्सा लिया। हालांकि उपचुनाव के बाद उन्हें संसद में पहुंचे अभी 9 माह ही हुए हैं।

पंजाब और हरियाणा के उलट हिमाचल प्रदेश तथा जम्मू और कश्मीर के सांसदों ने संसद में होने वाली बहसों में खासी दिलचस्पी दिखाई। इन पांच राज्यों के 34 सांसदों में से देखें तो शिमला से भाजपा सांसद वीरेंद्र कश्यप ने सबसे ज्यादा 131 बहसों में हिस्सा लिया। वहीं, ऊधमपुर के कांग्रेसी सांसद चौधरी लाल सिंह 84 बहसों में बोले। इसके बाद हमीरपुर से भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने 72, कांगड़ा से भाजपा सांसद राजन सुशांत ने 70 और अनंतनाग से नैकां सांसद मिर्जा महबूब बेग ने संसद में 58 बहसों में अपने विचार रखे।

बहसों में भागीदारी के निचले पायदान पर नजर डालें तो बंसल और प्रतिभा सिंह के अलावा गुडग़ांव से कांग्रेसी सांसद रहे राव इंद्रजीत सिंह ने 2, अमृतसर से भाजपा सांसद नवजोत सिद्धू ने 3, संगरूर से कांग्रेसी सांसद विजयइंद्र सिंगला ने 4 और सिरसा से कांग्रेसी सांसद अशोक तंवर ने 4 बहसों में ही हिस्सेदारी की।

इस मसले पर सांसद नवजोत सिद्धू, विजयइंद्र सिंगला और अशोक तंवर के साथ बार-बार कोशिशों के बावजूद संपर्क नहीं हो पाया। संपर्क करने पर सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर ने कहा कि वह उनके काम के बारे में कोई टिप्पणी नहीं कर सकती। 


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