कांग्रेस में राहुल को PM प्रत्याशी घोषित करने की हिम्मत नहीं: स्मृति

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Sunday, March 02, 2014-4:13 PM

जालंधर: महंगाई की जन्मदाता कांग्रेस में राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद का प्रत्याशी घोषित करने की हिम्मत नहीं है क्योंकि उसे अपनी हार साफ दिखाई पड़ रही है। उक्त बातों का प्रकटावा भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष स्मृति ईरानी ने किया। वह भाजपा सी.ए. सैल द्वारा आयोजित देश के अतीत, मौजूदा व भविष्य के हालातों के बारे बुद्धिजीवी सम्मेलन में भाग लेने हेतु महानगर पहुंचीं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह कह रहे हैं कि वह चुनाव नहीं लड़ेंगे क्योंकि उन्हें 2 बार प्रधानमंत्री बनने के बाद अब हार का मुंह देखना पसंद नहीं। ईरानी ने कहा कि वाजपेयी सरकार के समय देश सही हालात में था लेकिन मौजूदा सरकार ने भारत को पीछे धकेलने में कोई कसर नहीं छोड़ी। पहले भारत सोने की चिडिय़ा के नाम से जाना जाता था लेकिन अब वह महंगाई के कारण जाना जाता है। केन्द्र के पास 209 करोड़ रुपए बलात्कार पीड़ितों हेतु पड़े हुए हैं लेकिन क्रैडिट लेने के चलते उसे राज्य सरकारों को नहीं भेजा गया ताकि उसका फायदा वह न ले जाएं।

स्मृति ने कहा कि केन्द्र की कांग्रेस सरकार बलात्कार पीड़ितों की मदद के पीछे भी क्रैडिट चाहती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के 10 साल के शासन के दौरान  देश की 60 प्रतिशत जनता दो वक्त की रोटी के लिए भी तरस रही है। देश की अर्थव्यवस्था पटरी से उतर चुकी है। उद्योगपतियों का फैक्टरियां चलाना मुश्किल हो रहा है। यू.पी. में ऐसे हालात हैं कि 8 माह की गर्भवती महिला को अपनी कोख तक बेचनी पड़ रही है। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद सरकार हरकत में आई और खाद्य सुरक्षा बिल अस्तित्व में आया।

उन्होंने कहा कि इसके विपरीत जब वाजपेयी की सरकार थी तो सन 2000 में 14 राज्य सूखाग्रस्त हुए और सरकार ने आर्थिक सहायता देकर परेशानी को हल किया लेकिन इस सरकार के समय में 50 हजार करोड़ के फ्रूट व सब्जी बर्बाद हो गए जिसे यदि गरीबों को दिया जाता तो 6 करोड़ लोग भरपेट खाना खा सकते थे। उन्होंने कहा कि लोग खेतीबाड़ी के प्रति नई तकनीक न होने के चलते ध्यान नहीं दे पा रहे। महंगाई का हल तभी संभव है जब केन्द्र में अच्छी सरकार बने। आज रुपया 40 प्रतिशत तक कमजोर हुआ जिसके लिए सरकार की नीतियां जिम्मेदार हैं।

उन्होंने कहा कि मनमोहन कांग्रेस के सेनापति नहीं हैं उनका रिमोट कंट्रोल सोनिया के हाथ में है। कोलगेट, 2जी, कॉमनवैल्थ सहित जितने घोटाले हुए उसका बोझ आम आदमी पर पड़ा। वाजपेयी सरकार के समय 6.5 करोड़ लोगों को 5 वर्ष में नौकरियां मिली थीं और यू.पी.ए. के 10 साल के समय में 27 लाख नौकरियां मिल पाईं। उन्होंने कहा कि 2015 में 90 मिलियन नौकरियों की जरूरत पड़ेगी जिसे केवल मोदी की अगुवाई में बनने वाली सरकार ही पूरा कर सकती है।


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