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. . .और जब फिसल गई नेता जी की जुबान

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Sunday, March 02, 2014-8:34 PM

लखनऊ: हाल ही में भारतीय जनता पार्टी का दामन थामने वाले इंडियन जस्टिस पार्टी (इंजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदित राज विजय शंखनाद रैली में भाषण के दौरान अंत में ‘जय श्रीराम’ की जगह ‘जय भीम’ बोल गए। बाद में जब उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ तो फिर उन्होंने ‘जय श्रीराम’ के नारे लगाए।

दलित नेता से भाजपा नेता बने उदित राज ने मोदी की विजय शंखनाद महारैली में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती पर प्रहार करते हुए कहा कि बसपा की जरूरत अब इस देश में नहीं है। इन्होंने दलितों को सिर्फ धोखा दिया है। दलितों का विकास भाजपा के नेतृत्व में ही संभव है।

उदित ने अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली राजग सरकार का गुणगान करते हुए कहा कि उन्होंने दलितों व वंचितों का ख्याल रखते हुए आरक्षण विरोधी विधेयक को पारित होने से बचाया।

उन्होंने कहा कि आरक्षण बचाने का काम कांग्रेस एवं मायावती ने नहीं किया। उन्होंने कांग्रेस पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि इस पार्टी ने दलितों के लिए कुछ नहीं किया। संवैधानिक अधिकार नहीं होता तो आज दलित समाज के लोग प्रशासनिक अधिकारी व विधायक नहीं बन पाते।

उदित राज ने कहा कि देश के जाने-माने दलित नेता रामविलास पासवान, रामदास अठावले समेत कई अन्य नेता आज भाजपा के साथ हैं सिर्फ अकेली एक नेता बाहर हैं, इनको इस बार जनता बाहर का रास्ता दिखा देगी। भाजपा नेता ने कहा कि दलित व सवर्ण समाज में जब-तक एकात्म नहीं होगा, तब-तक राष्ट्र का कल्याण नहीं हो सकता।

उन्होंने मोदी की गुणगान करते हुए कहा कि इनके नेतृत्व में देश में विकास की गंगा बहेगी और उस विकास की गंगा में वंचित व दलित समाज का भी उत्थान होगा। उदित ने कहा कि आने वाले चुनाव में जो समाज, देश व राष्ट्र की समृद्धि की बात करे, उसी के पक्ष में मतदान करें। जातिगत राजनीति पर हमला करते हुए उन्होंने कहा कि यह क्षणिक होता है, मूल्यों पर आधारित राजनीति दीर्घकालिक होती है।


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