तीन दर्जन इंस्पैक्टरों को 20 साल बाद मिली तरक्की

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Tuesday, March 04, 2014-12:36 AM
नई दिल्ली(सतेन्द्र त्रिपाठी): बीस साल से तरक्की बाट जोह रहे 34 इंस्पैक्टरों को आखिरकार तरक्की मिल ही गई। इन सबको सहायक आयुक्त(एसीपी) बना दिया गया है। इन सभी को एक साल पहले से ही एसीपी पद की सैलरी तो मिल रही थी, लेकिन रैंक नहीं मिला था।
 
अब इन्हें तरक्की के साथ ही रैंक दे दिया गया है। इनमें चार महिला इंस्पैक्टर भी शामिल है। इन महिला इंस्पैक्टरों के बैच के 40 पुरुष इंस्पैक्टरों को अब भी तरक्की का इंतजार है। अब सवाल यह है कि इनका नंबर कब तक आएगा। दिल्ली पुलिस में सोमवार को 1994 बैच के 34 इंस्पेक्टरों तरक्की मिल गई। इनमें 1982,83 व 85 बैच के सब इंस्पैक्टर शामिल है। इन तीनों ही बैच के सब इंस्पैक्टर एक साथ 1994 में इंस्पैक्टर बनाए गए थे। 1984 में सब इंस्पैक्टर का कोई बैच नहीं आया था। 
 
इससे यह भी साफ हो रहा है कि यह सभी इन सभी को पहली तरक्की तो 9 से 12 साल में ही मिल गई थी। लेकिन दूसरी तरक्की पाने के लिए लगभग 20 साल तक लंबा इंतजार करना पड़ गया। एसीपी स्कीम के तहत इन्हें किसी एक साल पहले तो किसी को कुछ माह पहले एसीपी पद के बराबर की सैलरी तो मिलने लगी थी, लेकिन कंधे पर दानिप्स कैडर नहीं लग पा रहा था। इससे इन लोगों में निराशा का माहौल था।
 
पुलिस आयुक्त नीरज कुमार के कार्यकाल से लगातार इन लोगों को तरक्की देने की आवाजें उठ रही थी। मामला कई बार गृहमंत्रालत तक भी गया था। लेकिन पद खाली नहीं होने के कारण मामला लटका हुआ था। एसीपी के लिए कुछ पद सीधी भर्ती से सुरक्षित है तो कुछ पद तरक्की वालों के लिए आरक्षित है। इस तरक्की में 1984 बैच के 44 सब इंस्पैक्टरों में से मात्र चार महिलाओं ही तरक्की मिल पाई है, 40 पुरुषों को अभी और इंतजार करना पड़ेगा। 

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