तेलंगाना पर गृह मंत्रालय की धीमी चाल

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Tuesday, March 04, 2014-10:41 AM

नई दिल्ली: ऐसा लगता है कि केन्द्र सरकार तेलंगाना को अलग राज्य बनाने के लिए तिथि की घोषणा करने में कोई जल्दी में नहीं यद्यपि राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने इस संबंधी प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर इसे वापस गृह मंत्रालय को भेज दिया है। तिथि की घोषणा एक तकनीकी नियम है जो उस समय इस्तेमाल किया जाता है, जब कोई नया राज्य बनता है।

मालूम हुआ है कि गृह मंत्रालय तेलंगाना के लिए एक तिथि तय करने की घोषणा अपनी मर्जी से करेगा। राज्यपाल ई.एस.एल. नरसिम्हन अलग राज्य बनने की अधिसूचना के बाद दोनों राज्यों के संयुक्त राज्यपाल होंगे। मालूम हुआ है कि सोनिया गांधी इस सप्ताह हैदराबाद का दौरा करेंगी और वहां एक विशाल रैली आयोजित की जाएगी। यह एक लंबे समय के बाद एक नया राज्य बनेगा और के. चंद्रशेखर राव मुख्यमंत्री बनेंगे।

भाजपा मुख्यालय बना किला
दिल्ली पुलिस ने भाजपा के राष्ट्रीय मुख्यालय कार्यालय 11-अशोक रोड पर सुरक्षा बढ़ा दी है। इसके 2 कारण हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता नरेन्द्र मोदी और एल.के. अडवानी दोनों को एन.एस.जी. सुरक्षा मिली हुई है और वे अक्सर भाजपा मुख्यालय में आते रहते हैं। दिल्ली पुलिस को इस संबंध में केन्द्रीय एजैंसियों की ओर से भी विशेष सूचना मिली है। ए.सी.पी. रैंक के अधिकारी के साथ एक विशेष टीम भाजपा कार्यालय के भीतर वी.वी.आई.पी. के आवागमन, सुरक्षा और यातायात की निगरानी के लिए वहां स्थायी रूप से तैनात होगी।

राजग में चिराग का उदय
लोजपा नेता चिराग पासवान राजग के 5 प्रवक्ताओं में से एक होंगे। चुनाव अभियान के दौरान चिराग अंग्रेजी और हिन्दी टी.वी. चर्चाओं में भाग लेंगे। लोजपा नेता ने कहा कि चिराग की इंगलिश बहुत अ‘छी है और वह किसी भी प्रश्र का तुरन्त जवाब देते हैं, जो चर्चा के लिए बहुत अ‘छा है।

वोहरा की खतरनाक रिपोर्ट
जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल एन.एन.  वोहरा जो  राज्यपाल समूह  का  नेतृत्व करते  हैं,  ने राज्यपालों  की संवैधानिक शक्तियों  और केन्द्रीय मंत्रियों द्वारा उनकी उपेक्षा किए जाने  पर अपनी गुप्त रिपोर्ट राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी को सौंप दी है। रिपोर्ट में यह कहा गया है कि कैसे कुछ केन्द्रीय मंत्री उनकी शक्तियों के अनुरूप उनका सम्मान नहीं करते।

मंत्रिमंडल की बैठक में शोक 

न कोई मुस्कान, न कोई मजाक, न कोई हंसी। केन्द्रीय मंत्रिमंडल की रविवार को हुई संभवत: अंतिम बैठक में कई मंत्री शामिल थे। संभवत: यह एक शोक सभा थी, क्योंकि किसी  को यह यकीन नहीं कि यू.पी.ए. मई-2014 में दोबारा सत्ता में आएगी। ये मंत्री मायूसी से एक-दूसरे की तरफ देखते पाए गए।


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