नई दिल्ली:चुनाव की तिथियों की घोषणा में हो रही देरी का फायदा उठाने में तमाम राजनीतिक दल लग गए हैं। मीडिया मैनेजमेंट जो हमेशा प्रचार शुरू होने के समय हुआ करता था उसे पहले ही कर लिया गया है। तमाम न्यूज चैनल ऐसे विज्ञापनों से भरे पड़ें हैं जिनमें तमाम सरकारें अपने प्रदेश के विकास की कहानी कहते नजर आ रहे हैं। हालांकि ये विज्ञापन सामान्य रूप से भी जारी किए जाते हैं लेकिन इस समय तो जैसे भरमार हो गई है। हर कोई ये साबित करने में लगा हुआ है कि उससे ज्यादा विकास कार्य किसी ने कराए ही नहीं हैं। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि अभी आदर्श आचार संहिता नहीं लागू हुई है और इन पर किया जाने वाला खर्च प्रचार खर्च में नहीं जुड़ेगा। 

टीवी चैनलों पर आपको उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के सरकारी विज्ञापन लगातार देखने को मिलेंगे। इन्हें बाकायदा जाने-माने एड मेकर्स से तैयार कराया गया है। सभी में मनोरम लोकेशंस और अमुक राज्यों के पर्यटन स्थलों को दिखाया जाता है और कहा जाता है कि इससे बेहतर राज्य और कोई हो ही नहीं सकता। हाल ही में छत्तीसगढ़ की रमन सिंह सरकार ने तो केवल नया रायपुर को हाईलाइट करते हुए एक एड बनवाया है जो लगातार टीवी चैनलों पर प्रसारित हो रहा है। बंगाल की ममता बनर्जी कहां पीछे रहने वाली थीं। उन्होंने तो एक कदम आगे जाते हुए ऐसा एड जारी किया है जिसमें अन्ना हजारे ये कहते हुए नजर आ रहे हैं कि वे ममता के साथ हैं और बाकी किसी पार्टी में ईमानदारी शेष नहीं रह गई है। बताया जाता है कि इसके लिए सभी पार्टियों ने चैनल्स के लिए मोटा पैकेज तय कर दिया है। इसके एवज में सभी चैनल उनके नेताओं की हो रही रैलियों को कवरेज दे रहे हैं। बाकायदा समय के हिसाब से सभी पार्टियों को प्राइम टाइम में स्लाट दिया जा रहा है, एक-एक सेकेंड का हिसाब रखकर। 

ऐसा नहीं है कि ये मामला किसी ने उठाया नहीं है। इस संबंध में एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में डाली गई थी लेकिन अदालत ने सरकार की उपलब्धियों का बखान करने वाली इन याचिकाओं पर विचार करने से ही मना कर दिया। न्यायालय ने कहा कि अब चुनाव होने वाले हैं और ऐसी स्थिति में इस तरह की याचिका पर सुनवाई के लिये उचित समय नहीं है। प्रधान न्यायाधीश पी सदाशिवम की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने याचिकाकर्ता के. चित्तिलापिल्ली से कहा कि वह आम चुनाव के बाद न्यायालय में आये। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि सरकारी खर्च पर सत्तारूढ़ दल और उसके नेताओं के प्रचार प्रसार के लिये विज्ञापनों पर करोड़ों रूपए खर्च किये जा रहे हैं। न्यायाधीशों ने कहा कि आप सही हैं लेकिन समय गलत है। चुनाव के बाद फिर प्रयास कीजिये। हम इस समय याचिका पर विचार नहीं कर सकते हैं। न्यायाधीशों ने याचिकाकर्ता से सवाल किया कि वह अंतिम क्षणों में न्यायालय क्यों आये? यानी फिलहाल चैनल वालों की मौज जारी रहेगी और विज्ञापनों की भरमार रहेगी।