मोदी के सहारे बिहार जीतने की कोशिश

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Tuesday, March 04, 2014-3:02 PM

पटना: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के नाम पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) से जनता दल (युनाइटेड) के अलग हो जाने के बाद बिहार की सभी लोकसभा सीटों पर जीत हासिल उन्हीं के सहारे जीतने की कोशिश की जा रही है। यही वजह है कि मोदी की ‘हुंकार रैलियों’ के लिए ऐसे स्थानों का चयन किया जा रहा है जिससे उनका संदेश पूरे बिहार में पहुंचाया जा सके।

राजनीति के जानकार भी कहते हैं कि सभी पार्टियों को यह मालूम है कि दिल्ली के सत्ता का रास्ता बिहार और उत्तर प्रदेश से ही होकर जाता है। बिहार में लोकसभा की 40 सीटें हैं और सभी संसदीय क्षेत्र में मोदी की रैली हो, यह मुमकिन नहीं है। मोदी की रैली के स्थलों पर गौर करें तो मोदी की पहली रैली पिछले वर्ष राजधानी पटना में हुई थी। इस रैली के जरिए मोदी ने पूरे राज्य में अपना संदेश दिया था। इसके बाद सोमवार को उतर बिहार की राजधानी माने जाने वाले मुजफ्फरपुर में मोदी ने लोगो को संबोधित किया। इस हुंकार रैली के जरिए मोदी ने बिहार के 16 जिलों में अपने संदेश को पहुंचाने की कोशिश की।

विशेषज्ञों का कहना है कि पटना की रैली में मोदी ने जहां केन्द्र और राज्य सरकार को निशाना बनाया था वहीं मुजफ्फरपुर की रैली में मोदी ने क्षेत्रीय समस्याओं और उनकी विशेषता के जरिए स्थानीय लोगों तक अपनी पहुंच बनाने की कोशिश की है। मुजफ्फरपुर की रैली में मोदी ने इस जिले के विश्व प्रसिद्घ लीची का जिक्र किया, तो मैथिली को मीठी भाषा बताकर लोगों के दिलों को छूने की कोशिश की। वहीं चंपारण के गन्ना किसानों का मुद्दा भी उठाया और बाढ़ का जिक्र कर लोगों के दर्द को सहलाने की कोशिश की।

मुजफ्फरपुर के जाने माने पत्रकार रविन्द्र कुमार कहते हैं कि मोदी ने उन सभी मुद्दों को उठाया जिसे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार छूना नहीं चाहते हैं। वह कहते हैं कि मोदी ने नीतीश के विकास को खोखला साबित करने के लिए कई आंकड़े भी प्रस्तुत किए। इधर, मोदी की 10 मार्च की रैली पूर्णिया में होनी तय है। इस रैली के जरिए मोदी सीमांचल के लोगों की समस्या पर बात करेंगे, वहीं 14 मार्च को गया में होने वाली रैली के माध्यम से मोदी मगध क्षेत्र और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को अपना संदेश देंगे।

इधर, भाजपा के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी कहते हैं कि होली के बाद भी मोदी की दो रैली होने की संभावना है। वह कहते हैं कि संभवत: 24 मार्च को मधेपुरा में मोदी की रैली होगी। मधेपुरा के जरिए मोदी कोसी और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अपने भविष्य की योजनाओं को लेागों को बताएंगे और अगली रैली संभवत: मध्य बिहार के सासाराम में होने की संभावना है। बहरहाल पिछले कई चुनावों में भाजपा के स्टार प्रचारक माने जाने वाले मोदी को जहां बिहार में प्रचार के लिए नहीं आने दिया गया था, वहीं अगले लोकसभा चुनाव के लिए मोदी ने रैलियों के जरिए पूरे बिहार में ही अपना संदेश देने की योजना बनाई है। मोदी की रैलियों में जुट रही भीड़ उम्मीद से कहीं ज्यादा है, परंतु इस भीड़ में शामिल कितने लोगों को मतदान केन्द्र तक लाने में भाजपा सफल होती है यह चुनाव परिणाम के आने के बाद ही पता चल पाएगा।


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