ऑनलाइन अर्जी पर हो विचार: कोर्ट

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Thursday, March 06, 2014-12:34 AM
नई दिल्ली : दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को राज्य सरकार से कहा कि वह वकीलों को जेल में बंद मुविक्कलों से कानूनी मुद्दों पर बातचीत के लिए मिलने के बारे में पूर्व अनुमति के लिए जेल अधिकारियों को  ऑनलाइन आवेदन की सुविधा देने पर विचार करे।
 
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश बी. डी. अहमद एवं न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल की पीठ ने कहा कि दिल्ली सरकार एवं अन्य (गृह सचिव एवं महानिदेशक कारावास सहित) को नोटिस जारी किए जाए। एक हलफनामा दाखिल किया जाए, जिसमें जेल जाने वाले वकीलों के लिए औपचारिकताओं का संकेत हो।
 
 पीठ ने दिल्ली सरकार से कहा कि वह वकीलों को जेल में बंद मुविक्कलों से कानूनी मुद्दों पर बातचीत के लिए पूर्व अनुमति मांगने के मकसद से जेल अधिकारियों को ऑनलाइन आवेदन की सुविधा देने पर विचार करे। उन्होंने कहा कि इससे वकीलों को मदद मिलेगी। उन्हें उस समय जेल के बाहर प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ेगी, जब उनके आवेदन पर विचार चल रहा हो।
 
 अदालत ने वकील अमित सहानी द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया। इस याचिका में महानिदेशक कारावास के 27 फरवरी को दिए उस आदेश को खारिज करने का अनुरोध किया गया है, जिसमें जेल में बंद कैदियों से कानूनी मुद्दों पर बातचीत के लिए मुलाकात को हफ्ते में केवल एक बार सीमित कर दिया गया है।

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