कहीं आपदा सुरक्षा पर भारी न पड़ जाए लोकसभा चुनाव!

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Thursday, March 06, 2014-5:32 PM

उत्तरकाशी: आपदा सुरक्षा में लेट-लतीफी तो है ही, ऊपर से मौसम भी साथ नहीं दे रहा है। आपदा सुरक्षा के कार्य के अलावा यात्रा व्यवस्था भी सिर पर है तो वहीं लोकसभा चुनावों की तिथियां भी घोषित होने से सारी व्यवस्थाओं को बनाना अब एक बहुत बड़ी चुनौती प्रशासन के समक्ष होगी।

आपदा सुरक्षा मानसून से पहले होनी है तथा हालात देख कर नहीं लगता कि सुरक्षा की गारंटी पूरी भी होगी। अब जबकि लोकसभा के चुनावों की घोषणा हो चुकी है और प्रशासन को निर्बाद्ध रूप से चुनावों को सम्पन्न कराने के लिए अपनी पूरी जिम्मेदारी सुनिश्चित करनी है।

ऐसे में आपदा सुरक्षा कार्यों के ऊपर इसका कितना असर पड़ेगा इसको लेकर लोगों में शंका है। आपदा प्रभावित क्षेत्रों में इस बात की चर्चा अधिक है कि जब सारी मशीनरी चुनाव में होगी तो इसका असर आपदा सुरक्षा के कार्यों पर निश्चित रूप से पड़ेगा।

गंगोत्री, यमुनोत्री तीर्थ धाम के इस जिले में मई से चार धाम यात्रा भी शुरू होनी है। यात्रा व्यवस्था की जिम्मेदारी भी प्रशासन के पास है। देश विदेश के श्रद्धालु इस यात्रा में आते हैं लिहाजा कोई कोर कसर न रहे इसके लिए शासन का प्रशासन पर दबाव कहीं अधिक रहता है। ऐसे में यह कार्य भी प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में होना लाजिमी है।

इधर, इन सारी व्यवस्थाओं के बीच आपदा प्रशासन के समक्ष कहीं बड़ी चुनौती है। लगातार 2 साल आपदा आने के बाद से उत्तरकाशी के हालात ठीक नहीं है। बाढ़ सुरक्षा अभी तक नहीं हुआ है। सड़कें जवाब दे रही हैं। पुल, रास्ते, मोटर मार्ग दुरुस्त नहीं हुए हैं और इन सबके बीच मानसून के लिए अगले कुछ महीने ही शेष बचे हैं। बदहाल सड़कों की शिकायत अब यहां के कई जनप्रतिनिधियों ने जिनमें पर्यटन व्यवसायी भी शामिल हैं, मुख्यमंत्री से करने की बात कही है।
 


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