‘इस्लाम दहशतगर्दी की इजाजत नहीं देता ’

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Thursday, March 06, 2014-5:12 PM

वाराणसी: शारजाह के मौलाना जफरुल हसन ने कहा है कि इस्लाम में दहशत गर्दी फैलाने की आजादी नहीं है और यह काम वही करते हैं जो इससे भटके हुए हैं। मौलाना ने वाराणसी के जामिया सल्किया मर्कजी दारम उजूम ‘डीम्ड यूनिवॢसटी’ के जलसे में कहा कि कुरआन में इस्लाम को छोडने पर ही दहशतगर्दी होने का जिक्र है। उन्होंने कहा कि जो इस्लाम को मानने वाला और अमल करने वाला होता है वह दहशतगर्दी से कभी ताल्लुक नहीं रखता। उन्होंने कहा कि इस्लाम पर यकीदा न रखने वाला ही दहशतगर्द होता है। मौलाना ने कहा कि पहले पैगम्बर हजरत आदम से लेकर आखिरी पैग्मबरे हजरत मोहम्मद(सल्ल) तक ने अमनो ऊमान का ही पैगाम दिया है। उन्होंने कहा कि इस्लाम का अर्थ(शांति) होता है।

उन्होंने कहा कि इस वक्त उम्मत पर जुल्म-ओ-ज्यादती का दौर चल रहा है। हम हिन्दुस्तानियों को मुल्क के प्रति जिम्मेदारियों का पूरा ख्याल रखते हुए माहौल बिगाडने वाले सिरफिरों से बचे बचने की कोशिश करनी चाहिए। मौलाना अब्दुल मतीन मदनी ने कहा कि ऊहले हदीस किताबे सुन्नत की रोशनी में दहशतगर्दी की निन्दा करती है। जलसे में नेपाल समेत देश के कई राज्यों से भाग ले रहे 50 से ज्यादा विद्वान प्रतिनिधियों ने दीनी तालीम के साथ आधुनिक तालीम देने पर बल दिया है।


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