उप्र : कांग्रेस को खलेगी पुराने सिपाही की कमी !

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Friday, March 07, 2014-10:21 PM

लखनऊ: जगदंबिका पाल के कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद अब उनका भाजपा में जाना तय माना जा रहा है। वह पूर्व में भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह से भी मिल चुके हैं। पाल हालांकि इस संबंध में अपने समर्थकों से बातचीत के बाद कोई निर्णय लेने की बात कह रहे हैं।

दूसरी ओर, पाल का ये कदम कांग्रेस के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता होने के कारण पाल उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का बड़ा चेहरा थे। वह कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं, लेकिन लंबे समय से अपनी उपेक्षा से नाराज थे। यहां तक की नए सांसद बने नेताओं को जहां केंद्र में मंत्री बनाया गया है, वहीं डुमरियागंज से सांसद पाल को नजरअंदाज किया गया।

उत्तर प्रदेश के सियासी इतिहास में पाल उस समय बेहद चर्चाओं में आ गए थे, जब फरवरी 1998 को उन्होंने तत्कालीन कल्याण सिंह सरकार के खिलाफ बगावत करते हुए राज्यपाल रोमेश भंडारी के सामने स्वयं सपा के समर्थन से सरकार बनाने का दावा पेश किया था। हैरतअंगेज, कदम उठाते हुए राज्यपाल ने उन्हें मुख्यमंत्री पद की शपथ तक दिला दी थी। राज्यपाल के इस कदम ने उत्तर प्रदेश के सियासी प्याले में तूफान ला दिया था। हालांकि बाद में विधानसभा में कल्याण सिंह ने पाल को शक्ति परीक्षण के दौरान करारी शिकस्त दी।

पाल के पक्ष में 196 विधानसभा सदस्यों ने मत दिया जबकि कल्याण के खेमे में 225 विधायक रहे। इसके बाद कल्याण सिंह ने पाल को अपने मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया। पाल ने अपने आगे का राजनीतिक सफर कांग्रेस से शुरू कर दिया। बाद में वह प्रदेश अध्यक्ष भी बने और तब से अभी तक कांग्रेस में ही थे।


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