स्वास्थ्य के मौलिक अधिकार से वंचित है आधी आबादी

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Saturday, March 08, 2014-11:32 PM
नई दिल्ली : आधी आबादी अभी भी स्वास्थ्य का  मौलिक हक हासिल नहीं कर पाई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के दक्षिण पूर्वी एशिया की क्षेत्रीय निदेशक डॉ पूनम खेत्रपाल कहती हैं कि आज बड़ी संख्या में महिलाएं उच्च शिक्षा  प्राप्त कर रही हैं और कामकाजी हो रही हैं। इसके बावजूद महिलाओं को समान कार्य के लिए 30-40 फीसदी कम वेतन दिया जाता है। महिलाओं ने सभी क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।
 
प्रतिष्ठित संगठनों में अग्रणी पदों पर काम करते हुए वे गृहिणी की भूमिका भी बखूबी निभा रही हैं और फिर भी महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार और अवसर प्राप्त नहीं हुए हैं। वह आज हिंसा,बलात्कार,घरेलू हिंसा जैसे जघन्य अपराधों की शिकार हो रही हैं। महिलाओं के खिलाफ होने वाले ये अपराध दुनिया भर में महिलाओं  की अपंगता एवं मौतों की मुख्य कारण बने हैं। डॉ खेत्रपाल के मुताबिक महिलाओं के स्वास्थ्य को सुरक्षित करना होगा।
 
उन्हें न केवल उनके जीवन के उत्पादक वर्षो में,बल्कि जीवन भर उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त करने का पूरा अधिकार है। एक स्वस्थ्य और सशक्त लड़की ही एक स्वस्थ्य महिला के रुप में विकसित होती हैं। एक स्वस्थ मां, स्वस्थ परिवार और स्वस्थ्य राष्ट्र का निर्माण करती है। महिलाओं के लिए स्वास्थ्य सेवाएं इस तरीके से उपलब्ध कराया जाना चाहिए कि वे महिलाओं की जरुरतों को पूरा कर सकें।
 
महिलाओं के लिए समर्पित पत्रिका आधी आबादी की संपादक मीनू गुप्ता का कहना है कि कम से कम एक दिन जो महिलाओं के नाम है,उस दिन तो कम से कम हम एक ऐसी दुनिया की कल्पना तो कर ही सकते हैं,जहां महिलाओं को एक समान अवसर मिलेंगे,वे समाज के हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ कदम से कदम मिलाकर चलेंगी।

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