...जब लोहिया ने उठाया था इंदिरा गांधी के रहन-सहन पर सवाल

  • ...जब लोहिया ने उठाया था इंदिरा गांधी के रहन-सहन पर सवाल
You Are HerePolitics
Tuesday, March 11, 2014-12:42 PM

चंडीगढ़: आज भी वंशवाद की नीति पर कई बार नेताओं में बहस होती हैं लेकिन एक जमाने में जब इंदिरा गांधी को नेहरू जी का उत्तराधिकारी घोषित किया गया था, तब राजनीति में वंशवाद की चर्चा बहुत होती थी। कहा जाता था कि नेहरू जी भी चाहते थे कि राजनीति में इंदिरा ही उनकी उत्तराधिकारी हों।

कांग्रेस की वंशवाद नीति का विरोध

इस पर बहस करने वालों में तब राममनोहर लोहिया बहुत आगे थे। वह तो इंदिरा गांधी के कोट और उनके रहन-सहन पर भी सवाल उठाया करते थे। लोग उनकी बातों को बहुत दिलचस्पी से सुना करते थे। लोहिया का असर उन दिनों के बड़े से बड़े साहित्यकार और नौजवानों पर खूब पड़ा। समय बदला। इंदिरा गांधी ने जब देश में आपात्काल लगाया उस समय जयप्रकाश नारायण का आंदोलन अपने पूरे उफान पर था। इस आंदोलन को जयप्रकाश जी के साथ लोहिया जी के विचारों से प्रभावित नौजवानों ने आगे बढय़ा था। इसमें लालू यादव, मुलायम सिंह यादव, नितीश कुमार के नाम प्रमुख हैं। उस समय के ये नौजवान आज भारत में अपने-अपने दलों के नेता हैं और राजनीति के शीर्ष पर हैं।

 

नितीश को छोड़कर मुलायम और लालू ने अपने बच्चों को आगे बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। कहा जाता है कि जिस फसल को हमने लगाया, हमने पाला-पोसा, उसे कोई और क्यों काटे? इनका विरोध कांग्रेस की नीतियों और वंशवाद से था मगर ये उसी रास्ते पर चलने लगे जिसका विरोध करते आए थे।

राजनीति में लड़कियों को आगे लाने की परंपरा
भारतीय राजनीति में लड़कियों को आगे लाने की परंपरा यदि कांग्रेस ने शुरू की तो बाकी भी पीछे क्यों रहें। इसमें नई एंट्री हैं लालू यादव की पुत्री मीसा भारती की। बिहार में यदि मीसा हैं तो कश्मीर में मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी महबूबा मुफ्ती हैं।
-तमिलनाडु में डी.एम.के. के नेता करुणानिधि की बेटी कनिमोझी हैं।
-संगमा की बेटी आगाथा संगमा। सिर्फ लड़कियां ही क्यों पत्नियां और बहुएं भी पीछे नहीं हैं।
दिल्ली की भूतपूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित कांग्रेसी नेता उमाशंकर दीक्षित की बहू ही थीं।
इंदिरा गांधी की दोनों बहुएं सोनिया गांधी और मेनका गांधी को तो हम सब जानते ही हैं। यह बात अलग है कि एक कांग्रेस में हैं तो दूसरी भारतीय जनता पार्टी में।


पता चला है कि इस बार के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस से भूतपूर्व रेलवे मंत्री पवन बंसल और महाराष्ट्र के भूतपूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण की पत्नी को टिकट मिलने वाला है। लालू तो पहले ही राबड़ी देवी को बिहार का मुख्यमंत्री बना चुके हैं। इस बार भी उन्हें टिकट दिया गया है। यानि कि राजनीति भी एक तरह से राजशाही है जहां राजकुल में उत्पन्न लड़का ही राजा हो सकता था, उसी तरह इन क्षेत्रीय दलों में अपने-अपने लड़के-लड़कियों को सिंहासन सौंपने की होड़ लगी है। वैसे कांग्रेस भी इसमें पीछे नहीं है। राहुल और प्रियंका कांग्रेसी विरासत के दावेदार हैं ही।

 

कांग्रेसी प्रियंका को बार-बार राजनीति में लाने की मांग करते ही रहते हैं। यही नहीं वंशवाद को आगे बढ़ाने के लिए वही तर्क इस्तेमाल किए जा रहे हैं जो उसके खिलाफ होते थे। मीसा के बारे में पूछे जाने पर राष्ट्रीय जनता दल के एक नेता ने टी.वी. पर कहा कि यह लड़कियों और औरतों का जमाना है। मीसा को टिकट देकर लालू जी लड़कियों को आगे बढ़ाने और वुमैन एमपॉवरमैंट का काम कर रहे हैं।

 

कई बार लगता है कि इन दिनों जिस तरह फिल्मी सितारों की बेटियां जैसे कि करिश्मा, करीना, सोनाक्षी सिन्हा, श्रद्धा कपूर, सोनम कपूर, ऐशा देवल, श्रुति हसन आदि अपने-अपने माता-पिताओं और परिवारों के पहले से स्थापित नाम और ब्रांड पर फिल्म जगत में स्थापित हो गईं राजनीति में भी वही चलन चल पड़ा है। कई अभिनेता कहते हैं कि यदि डाक्टर का बेटा या बेटी डाक्टर हो सकता है तो एक्टर के बच्चे एक्टर क्यों नहीं हो सकते? नेता अभी ऐसा नहीं कहते मगर जल्दी ही ऐसा कहने लगेंगे। यह तो कहते ही हैं कि उनके बच्चों को भी आगे बढऩे और उनकी तरह देश और लोगों की सेवा करने का अधिकार है क्योंकि इनके लिए कोई भी प्रदेश एक खेत है, वहां की जनता इनकी फसल।

चुनाव इस फसल को काटने का अच्छा मौका होता है। उसके वोट इनकी कमाई है तो यह कमाई इनके परिवार के खाते में क्यों न जाए। वंशवाद का वायरस जिन 2 दलों में अभी कम दिखाई देता है, वह है भारतीय जनता पार्टी और लेफ्ट की पार्टियां। आने वाले दिनों में ये पार्टियां भी इस राह पर नहीं चलेंगी, कौन कह सकता है।


विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं ? भारत मैट्रीमोनी में  निःशुल्क  रजिस्टर  करें !

Recommended For You