जेल में ही मनेगी सहारा की होली, 25 मार्च को होगी अगली सुनवाई

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Thursday, March 13, 2014-5:04 PM

नई दिल्ली: सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत राय को कुछ दिन और तिहाड जेल में बिताना पड सकता है, क्योंकि उच्चतम न्यायालय ने अदालत की अवमानना के एक मामले में उन्हें निजी जमानती बांड पर रिहा किये जाने का आग्रह मानने से इन्कार कर दिया।

न्यायमूॢत के एस राधाकृष्णन और न्यायमूॢत जे एस केहर की खंडपीठ ने सहारा प्रमुख को जमानत पर रिहा किये जाने का आग्रह यह कहते हुए ठुकरा दिया कि याचिकाकर्ता की जमानत की कुंजी उसके हाथ में है। न्यायालय ने कहा कि जब तक सहारा समूह की ओर से निवेशकों से जुटाई गई रकम वापस करने के लिए कोई उचित प्रस्ताव नहीं आता तब तक राय को जमानत देने पर विचार संभव नहीं है।

हालांकि खंडपीठ ने यह स्पष्ट किया कि गलत तरीके से हिरासत में भेजने के उसके आदेश के खिलाफ याचिकाकर्ता की दलीलों पर 25 मार्च को विचार किया जाएगा। 

इससे पहले राय की ओर से जानेमाने कानूनविद और वरिष्ठ अधिवक्ता राम जेठमलानी ने दलील दी कि उनके मुवक्किल तत्काल 25 अरब रुपये जमा कराने को तैयार हैं। उन्होंने निजी जमानती बांड पर रिहा किये जाने का न्यायालय से आग्रह किया, लेकिन खंडपीठ ने उनकी दलील यह कहते हुए ठुकरा दी कि राय की गिरफ्तारी फिलहाल न्यायालय के 31 अगस्त 2012 के आदेश पर अमल का एक जरिया है।

खंडपीठ ने कहा कि न्यायालय ने भारतीय प्रतिभूति विनिमय बोर्ड (सेबी) की अवमानना याचिका पर तो उन्हें कोई सजा ही नहीं सुनाई है। गौरतलब है कि शीर्ष अदालत ने निवेशकों से जुटाई गई रकम न लौटाने से संबंधित विवाद में व्यक्तिगत पेशी वारंट पर अमल नहीं करने को लेकर सहारा प्रमुख और उनके दो निदेशकों, रविशंकर दुबे और अशोक रॉय चौधरी को 11 मार्च तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। 


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