जरा संभल कर, कहीं उड़ न जाएं चेहरे के रंग

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Thursday, March 13, 2014-11:31 PM

नई दिल्ली (निहाल सिंह): होली पर चेहरे और शरीर पर रंग लगाना स्वाभाविक है लेकिन खुशी भरे इस त्यौहार में जरा सी गलती आपके चेहरे के रंग उड़ा सकती है। होली के मौके पर बाजार में ज्यादातर रसायनिक रंगों की बिक्री धडल्ले से होती है, जो आपके चेहरे और त्वचा को काफी नुक्सान पहुंचा सकते हैं।


होली के मौके पर ज्यादातर लोग गलत रंगों के इस्तेमाल से होने वाले नुक्सान को या तो नजर अंदाज करते है या इससे अनजान होते हैं। कुछ रंग हमारी त्वचा एवं बालों के लिए हानिकारक होते हैं, जो आपकी खुशी में बाधा डाल सकते हैं, इसलिए इससे सतर्क रहना बहुत     जरूरी है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के डर्मिटोलॉजिस्ट विभाग के हैड डॉ. वी.के. शर्मा  का कहना है कि आजकल बाजार में उपलब्ध अधिकांश रंगों में रसायनिक पदार्थ मिले होते हैं, कुछ रंगों में तो तांबा, कांच, चांदी, एल्युमीनियम एवं आयोडीन भी मिला होता है।

इसके इस्तेमाल से सबसे पहले बाल एवं त्वचा प्रभावित  होती है। इसके अलावा रसायन न सिर्फ बालों को ब्लीच करते हैं, बल्कि वे इसे काफी बुरी तरह से क्षतिग्रस्त भी कर देते हैं।रोकथाम उपचार से बेहतर : विशेषज्ञों के मुताबिक रोकथाम की प्रक्रिया सदैव ही उपचार से बेहतर होती है। होली केवल रंगों से कपड़ों को सराबोर करने या त्वचा एवं बालों को रंगीन करने का अवसर नहीं है। यह कभी-कभी घातक भी साबित हो सकता है। होली के बाद बालों में रुसी का बढ़ जाना तथा सिर में खुजली होना एक और सामान्य शिकायत है।


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