उम्र की मोहताज नहीं होती कला

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Friday, March 14, 2014-5:03 PM

हरिद्वार: कला उम्र की मोहताज नहीं होती। उम्र बढऩे के बावजूद भी कलाकार की कला की भूख कभी खत्म नहीं होती। चांद भाई खिलौने वाले इसका साक्षात उदाहरण हैं।

 77 वर्र्षीय चांद भाई लोहे की तार से गांधी जी व इंदिरा गांधी आदि सहित कई बड़ी हस्तियों के चित्र बना चुके हैं। इसमें वह प्लास के अलावा किसी भी अन्य यंत्र का इस्तेमाल नहीं करते हैं। मूल रूप से दिल्ली के रहने वाले चांद भाई कई शहरों में अपनी कला का प्रदर्शन कर चुके हैं।

उन्हें दुख है कि उनकी कला को पर्याप्त सम्मान नहीं मिल पाया। आजीविका के लिए वह मेलों आदि में अपने हाथों से बनाए गए खिलौने आदि बेचने का काम करते हैं। उन्होंने बताया कि वह मुंबई की मशहूर जहांगीर आर्ट गैलरी के सामने बैठ कर अपनी कला का प्रदर्शन करते थे।

इस दौरान उनकी बनाई गई कई कलाकृतियों को लोग खरीद कर ले गए जोकि अब म्यूजियम की शोभा बढ़ा रही हैं। चांद भाई अपनी हस्तकला में इतने निपुण हैं कि वह तारों से किसी भी कलाकृति का निर्माण कर सकते हैं। इस समय वह ज्वालापुर आए हुए हैं।

ज्वालापुर में पक्षियों के पालन के शौकीन उनसे पिंजरे बनवाने के लिए उनके पास पहुंच रहे हैं। इसके अलावा वह बच्चों के खिलौने जिनमें मछली, स्टार गेम, साइकिल, मैजिक गेम आदि भी तारों से बनाते हैं। तारों से ही वे किसी की भी तस्वीर तक बना देते हैं।

उन्होंने बताया कि यह कला उन्हें विरासत में मिली है। परिवार के लोग यही काम करते थे। देखते ही देखते वह भी इस कार्य में पारंगत हो गए। अब यही उनकी आजीविका का मुख्य साधन है। उन्होंने बताया कि वृद्ध होने के बावजूद भी पेट भरने के लिए वह काम करने को विवश हैं। कई बार मांग करने के बावजूद उन्हें सरकार से कोई मदद नहीं मिली।
 


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