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पिता की नसीहत, बेटी का हौसला

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Saturday, March 15, 2014-2:49 PM

गुड़गांव: कहते हैं कि यदि मनुष्य के हौसले बुलंद हो तो वह किसी को भी मात दे सकता है और फिर से जीवन को पटरी पर ला सकता है। इस बात की मिसाल है गुड़गांव की रहने वाली शबाना जो 12वीं क्लास की छात्रा है और आजकल परीक्षा दे रही है, परन्तु हाथों के साथ नहीं पैरों के साथ लिख कर।

जी हां, है न हैरान करने वाली बात क्या पैरों के साथ लिख कर भी कोई 12वीं क्लास तक पहुंच सकता है। दरअसल शबाना जब चौथी क्लास में थी तो एक दिन प्रातः काल अपनी बुआ के घर के पास ट्रक द्वारा टूट कर गिरी हाई-टेंशन वोल्टेज की तारों की चपेट में आ गई थी। गुड़गांव और फिर दिल्ली के सफदरगंज अस्पताल में लगातार सात महीने इलाज करवाने के बाद शबाना की जान तो बच गई परन्तु अपने दोनों हाथ गवां बैठी।

अपने दोनों हाथ खोने के बाद शबाना के परिवार वालों को आगे की जिंदगी पहाड़ सी लगने लगी, परन्तु पिता की नसीहत ने शबाना का हौसला बढ़ाया और पिता ने शबाना को पैरों में पेंसिल फसा कर लिखने की सलाह दी। जब शबाना पैरों के साथ लिखने में पूरी तरह परफेक्ट हो गई तो फिर से स्कूल में दाख़िला लेने की ठान ली। कई साल बीते और शबाना चौथी क्लास से 12वीं क्लास तक पहुंच गई और आज अपने बुलंद हौंसले के चलते 12 वीं क्लास की परीक्षा दे रही है।

हालांकि शबाना 12 वीं के पास करन के बाद डिजाइनर बनना चाहती है, परन्तु उसकी पढ़ाई के आगे उस की गरीबी पत्थर बन रही है। शबाना के पिता मजदूरी करके अपने परिवार को पाल रहे हैं। इस परिवार को आज तक सरकार की तरफ से कोई भी सरकारी मदद नहीं मिली है। फिलहाल शबाना का परिवार और शबाना चाहती है कि उसे कहीं से मदद मिले जिससे वह अपनी आगे की जिंदगी ठीक तरह जी सकें।


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