इंटरव्यू से क्यों बचते रहे हैं मोदी-राहुल?

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Sunday, March 16, 2014-2:53 PM

नई दिल्ली: चुनावी रैलियों में दहाडऩे वाले भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को इंटरव्यू देने के नाम पर ना जाने क्यों सांप सूंघ जाता है। कुछ ऐसा ही हाल कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का भी है।

दोनों नेता रैलियों में जनता से जुड़ी व विकास की बातें तो करते हैं लेकिन मीडिया को इंटरव्यू देने से बचते रहते हैं। राहुल ने हाल ही में एक अंग्रेजी न्यूज चैनल को तो इंटरव्यू दिया लेकिन उसके बाद से अखबारों व चैनलों पर उनका साक्षात्कार देखने को नहीं मिला। शायद ऐसा इसलिए है क्योंकि या तो उनकी बातों का असर नहीं हो रहा है या फिर वह जवाब देना नहीं चाहते हैं।

नरेंद्र मोदी भी लगातार इंटरव्यू देने और मीडिया के सवालों से बचने की कोशिश कर रहे हैं। शायद मोदी अपने पिछले अनुभव के चलते ऐसा कर रहे हैं। पिछले कुछ सालों में ये देखने में आया है कि मोदी ने पत्रकारों को इंटरव्यू देने का समय तो दिया लेकिन गुजरात दंगों व कुछ अन्य टेढ़े सवाल पूछे जाने पर वह बीच में ही चले गए। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या खुद को प्रधानमंत्री पद का प्रबल दावेदार होने का दम भरने वाले मोदी असली सवालों से बचकर भाग रहे हैं?
साल 2007 में एक अंग्रेजी न्यूज चैनल को इंटरव्यू देने के लिए मोदी राजी हो गए। इंटरव्यू कर रहे पत्रकार ने मोदी से सवाल पूछने शुरू किए। मात्र तीन-साढ़े तीन मिनट के बाद ही मोदी उकताने लगे।

मोदी से जैसे ही गुजरात दंगों पर माफी से जुड़ा सवाल पूछा गया वह झल्ला गए और उठकर चलने को तैयार गए। मोदी इस कदर कुपित हुए कि एंकर के लाख समझाने के बाद भी इंटरव्यू पूरा करने के लिए तैयार नहीं हुए।

इसी तरह, वर्ष 2009 में भी एक हिंदी न्यूज चैनल के पत्रकार को नरेंद्र मोदी से इंटरव्यू करने का मौका मिला। यहां भी पिछली बार की तरह ही हाल हुआ। अन्य राज्यों में जाकर राजनीतिक रोटियां सेकने वाले मोदी गुजरात दंगों की चर्चा होते ही भड़क गए। 5 मिनट के सवालों के जवाब देने के बाद ही मोदी असहज दिखने लगे। कुछ और कड़े सवाल पूछे जाने पर उन्होंने इंटरव्यू बीच में ही रोकने का इशारा किया। हद तो तब हो गई जब गुजरात के विकास मॉडल का दम भरने वाले नरेंद्र मोदी ने पत्रकार से यहां तक कह दिया कि अब हमारी मुलाकात कभी नहीं होगी।

इसके बाद आखिरकार वर्ष 2012 में नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर एक उर्दू अखबार के  साक्षात्कार के न्यौते को स्वीकार किया। यहां भी मोदी की टीम की तरफ से कहा गया कि इंटरव्यू में पूछे जाने वाले सवालों की लिस्ट पहले ही भेजी जाए। हालांकि, इससे इनकार कर दिया गया। मोदी किसी तरह इंटरव्यू पर राजी हो गए। ये शायद पहला ऐसा इंटरव्यू था, जिसमें अखबार के संपादक ने मांग रखी कि इंटरव्यू पूरा करना होगा। हालांकि, इस इंटरव्यू के बाद लोगों ने कहा कि सवालों के सीधे जवाब देने के बजाए मोदी बचाव मुद्रा में नजर आए। 



 


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