खोबरागड़े घटनाक्रम ‘अत्यंत कष्टप्रद’, इसे बंद करने का समय: खुर्शीद

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Sunday, March 16, 2014-3:40 PM

नई दिल्ली: राजनयिक देवयानी खोबरागड़े से संबंधित घटनाक्रम को ‘‘अत्यंत कष्टप्रद’’ करार देते हुए विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने आज कहा कि मुद्दे को ‘‘बंद’’ कर दिया जाना चाहिए और इसके लिए अमेरिका को कोई ‘‘राजनीतिक समाधान’’ निकालना चाहिए।

यह जिक्र करते हुए कि इस बारे में ‘‘व्यावहारिक विचार’’ हो रहा है और जब कुछ इस तरह का घटनाक्रम होता है तो भारत चिंता किए बिना नहीं रह सकता। उन्होंने कहा कि अदालत द्वारा पहले अभियोग को खारिज किए जाने से अमेरिकी प्रशासन को इसे पीछे छोड़ देने का अवसर मिला था। विदेश मंत्री ने सवाल उठाया कि वे ऐसा क्यों नहीं कर रहे हैं।

खुर्शीद ने एक न्यूज एजेंसी के साथ साक्षात्कार में कहा, ‘‘यहां तक कि सबसे खराब समय में भी, मैंने बार-बार बयान दिए कि यद्यपि जो कुछ हुआ है, वह अत्यंत कष्टप्रद है और हम मानते हैं कि जो कुछ हुआ है, वह गलत है तथा इसे और आगे नहीं ले जाना चाहिए, फिर भी इसका असर हमारे संबंधों पर नहीं पडऩा चाहिए । लेकिन व्यावहारिक विचार हो रहा है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘जब भी इस तरह का कुछ घटित होता है तो हम चिंता किए बिना नहीं रह सकते । हमें अपने संबंधों को अक्षुण्ण रखने और असल में इन्हें मजबूत करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता के समय व्यावहारिक जटिलताओं को संतुलित करना होगा।’’

खुर्शीद से देवयानी खोबरागड़े पर वीजा फर्जीवाड़े और अपनी नौकरानी को ‘‘अवैध रूप से’’ कम वेतन देने तथा उसका ‘‘शोषण’’ करने के आरोप में अमेरिका द्वारा दोबारा अभियोग लगाए जाने के बारे में पूछा गया। कल देवयानी के खिलाफ दोबारा से दायर अभियोग अमेरिकी अदालत द्वारा पूर्व के अभियोग को खारिज कर दिए जाने के एक दिन बाद आया।

खुर्शीद ने कहा कि ‘‘कुल मिलाकर इसका एक प्रभाव है तथा यहां लोग काफी आहत हुए हैं। अदालत द्वारा अभियोग को खारिज कर दिए जाने से आपको इसे पीछे छोड़ देने का एक मौका मिला था, तो हम ऐसा क्यों नहीं कर रहे हैं...उन्हें कोई राजनीतिक समाधान ढंूढऩा चाहिए।’’

मुद्दे पर अपने अमेरिकी समकक्ष जॉन केरी के साथ बैठक का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, ‘‘हम पहले ही सहमत हो चुके हैं कि दोनों पक्ष छूट और विशेषाधिकार के मुद्दे को देखने के लिए बैठक करेंगे, ताकि भविष्य में कोई दिक्कत नहीं हो। जब आप यह चाहते हैं कि भविष्य में कोई दिक्कत नहीं हो तो बेहतर यही होगा कि जो कुछ हुआ है, उसे पीछे छोड़ दिया जाए।’’

खुर्शीद ने यह भी कहा कि भारत इस बात को मानता है कि जो भी उन्होंने किया, उसके लिए कोई न्यायसंगत आधार नहीं है।  कल विदेश मंत्रालय ने दूसरे अभियोग के ‘गैर जरूरी’ कदम पर निराशा जताते हुए इस बात पर जोर दिया था कि फैसले का कोई भी परिणाम ‘दुर्भाग्यवश’ भारत-अमेरिकी रणनीतिक साझेदारी बनाने के दोनों देशों के प्रयासों को प्रभावित करेगा।

वर्ष 1999 के बैच की विदेश सेवा अधिकारी देवयानी खोबरागड़े को 12 दिसंबर को न्यूयॉर्क में गिरफ्तार किया गया था और कपड़े उतारकर उनकी तलाशी ली गई थी। इस घटना के बाद से दोनों देशों के बीच में तनाव पैदा हो गया था और भारत ने प्रतिक्रिया जताते हुए अमेरिकी राजनयिकों के कुछ वर्गों के विशेषाधिकार कम करने के साथ-साथ कई कदम उठाए थे।

खोबरागड़े को 2.5 लाख डॉलर के बॉण्ड पर रिहा किया गया था। इसके बाद उन्हें पूर्ण राजनयिक छूट दी गई थी और वे 10 जनवरी को भारत वापस आ गईं। उसके बाद से उन्हें नयी दिल्ली में विदेश मंत्रालय में स्थानांतरित किया गया है।


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