अन्ना-ममता ‘फ्लॉप शो’

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Monday, March 17, 2014-1:12 PM

नई दिल्ली: जब समाज सेवक अन्ना हजारे ने कहा कि ममता बनर्जी के साथ ऐतिहासिक रामलीला मैदान में उनकी पहली सार्वजनिक रैली को विफल बनाने के लिए एक बहुत बड़ी राजनीतिक साजिश रची गई थी, तो वह संभवत: सच्चाई ही बयान कर रहे थे।

यद्यपि एक पत्रकार और राज्यसभा के पूर्व सदस्य संतोष भारतीय ने गत दिवस एक प्रैस कॉन्फ्रैंस कर अन्ना से प्र्रश्र किया कि उन जैसे एक संत को भीड़ के आकार की क्यों ङ्क्षचता करनी चाहिए? उन्होंने इस बारे में कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया कि अन्ना-ममता की संयुक्त रैली में लोग क्यों नहीं आए? संतोष ने रैली के आयोजन में अपनी भूमिका को स्वीकार किया मगर साथ ही कहा कि अगर लोग ममता और अन्ना को सुनने के लिए रैली में नहीं आते तो वह क्या कर सकते हैं।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी की करीबी सूत्रों ने बताया कि ममता से लगभग 3 महीने पहले उनके विश्वासपात्र मुकुल राय के जरिए संतोष भारतीय उनसे मिले थे। संतोष ने ममता को बताया था कि अन्ना हजारे प्रधानमंत्री पद और राष्ट्रीय अभियान के लिए उनका समर्थन करेंगे, अगर वह समाज सेवक के कार्यक्रम पर सहमत हो जाएं। एक बार 17 सूत्रीय कार्यक्रम को अंतिम रूप दिया गया तो संतोष ने मुकुल राय को बताया कि वह ममता-अन्ना की संयुक्त रैली के लिए रामलीला मैदान में एक बड़ी रैली का आयोजन करेंगे, अगर उनको फंड दिया गया। वह एक पत्रकार हैं इसलिए उनके पास पैसा नहीं है।

बताया जाता है कि मुकुल राय ने पार्टी के सांसद के.डी. सिंह को निर्देश दिया कि वह संतोष को सभी संसाधन उपलब्ध कराएं जिन्होंने भारी भीड़ लाने का वायदा किया। संतोष को मई 2014 के चुनावों के बाद राज्यसभा की सीट देने का भी वायदा किया गया। इसके साथ ही उनके उद्योगपति मित्र कमल मोराका का भी पुनर्वास किया जाएगा। 90 के दशक में चंद्रशेखर सरकार में मंत्री रहने के बाद से एक दशक से मोराका राजनीति विहीन जिंदगी व्यतीत कर रहे हैं।

ममता के लिए यह जीत की स्थिति थी जो अन्ना की मदद से पश्चिम बंगाल के बाहर कम से कम 20 सीटें जीतने की उम्मीद लगाए हुए थे। हजारे अपने शिष्य अरविंद केजरीवाल से ठगे जाने से मायूस थे। हजारे को ममता के साथ संबंध बनाना रास आया।

अन्ना की प्रवक्ता सुनीता गोधरा के अनुसार संतोष निर्भय दुष्कर्म मामले के दौरान अन्ना के दरबार में शामिल होने के बाद ही वह अन्ना के करीब आए। संतोष अन्ना के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान में जनरल वी.के. सिंह को भी लेकर आए। बाद में उन्होंने अन्ना को ममता बनर्जी के बारे में सुझाव दिया और अन्ना इस पर राजी हो गए। काफी चर्चा के बाद अन्ना-ममता 18 फरवरी को अभियान के लिए संयुक्त कार्यक्रम को अंतिम रूप दे पाए। रैली के लिए उपलब्ध धन और संसाधनों का क्या हुआ यह मालूम नहीं मगर हताश ममता ने राष्ट्रीय स्तर का अपना स्वप्न छोड़ दिया तथा पश्चिम बंगाल लौट आईं ताकि राज्य के साथ झारखंड, ओडिशा और उत्तरी पूर्वी राज्यों पर अपना ध्यान केन्द्रित कर सकें। संतोष ने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह शो फ्लॉप क्यों हुआ मगर स्वीकार किया कि वह उस समय अन्ना के साथ थे जब वह ममता जी के साथ मिलने गए थे। गुपचुप कोई सौदेबाजी नहीं हुई और रैली को तारपीडो करने की कोई योजना नहीं थी। इसका कोई जवाब देने को तैयार नहीं कि दिल्ली के फ्लॉप शो से किसको फायदा हुआ।
 


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