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वाराणसी में जमानत जब्त करवाती रही है कांग्रेस, केजरीवाल का क्या होगा

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Tuesday, March 18, 2014-5:04 PM

नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी के अध्यक्ष संजय सिंह ने पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल के नरेंद्र मोदी के सामने वाराणसी सीट से मैदान में उतरने की घोषणा तो कर दी है लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर नरेंद्र मोदी के सामने केजरीवाल की हालत क्या होगी। क्या दिल्ली में शिला दीक्षित के खिलाफ जन भावनाओं को भुना कर जीत हासिल करने वाले केजरीवाल वाराणसी में मोदी के सामने टिक पाएंगे।

वाराणसी की सीट पारंपरिक तौर पर भाजपा की सीट समझी जाती है। 1991 के बाद हुए छह चुनावों में इस सीट पर भाजपा का कब्जा रहा है। सिर्फ 2004 के चुनाव में कांग्रेस के राजेश कुमार मिश्रा चुनाव जीते थे। इस चुनाव को यदि अपवाद माना जाए तो कांग्रेस इस सीट पर अपनी जमानत जब्त करवाती रही है। सिर्फ 1999 में ही कांग्रेसी प्रत्याशी राजेश कुमार मिश्रा अपनी जमानत बचा पाए थे। 2004 के चुनाव को छोड़ दिया जाए तो 1991 के बाद हुए कुल छह लोकसभा चुनावों में यहां भाजपा को कोई टक्कर नहीं दे सका है।

1991 से लेकर 1998 तक लेकर हुए तीन लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने इस सीट पर वामपंथियों से समझोता किया और सीपीएम की उम्मीदवार इन तीन चुनावों में दूसरे नं पर रहा। जबकि 1999, 2004 और 2009 के चुनाव में सपा द्वारा खड़े किए गए उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी। बसपा भी 1991 से इस सीट पर अपनी जमानत गवांती आई है। सिर्फ 2009 के चुनाव में बसपा ने मुख्तार अंसारी ने भाजपा उम्मीदवार मुरली मनोहर जोशी को टक्कर दी थी। ऐसे में सवाल पैदा होता है कि बिना किसी स्थानीय संपर्क और मजबूत संगठन की गैरमौजूदगी में केजरीवाल भाजपा के इस गढ़ में मोदी के सामने किस हद तक टिक पाएंगे। इस सीट पर जीत तो बहुत बाद की बात है आम आदमी पार्टी को यहां जमानत बचाने के लिए भी नाकों चने चबाने पड़ सकते हैं।


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