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आपदा की भयावहता सरकारी चूक के कारण हुई: रावत

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Wednesday, March 19, 2014-9:44 AM

देहरादून: देर से ही सही सरकार ने स्वीकार तो कर लिया कि आपदा में चूक हुई है। पिछले मुख्यमंत्री बहुगुणा ने कार्यकाल के अन्तिम दिनों तक यह स्वीकार नहीं किया कि सरकार से कहीं कोई चूक हुई है, पर वर्तमान मुख्यमंत्री हरीश रावत ने यह मान लिया है कि आपदा की भयावहता सरकारी चूक के कारण हुई है।
 
प्रदेश के मुखिया हरीश रावत ने माना है कि वर्ष 2012 में अस्सी गंगा में आई बाढ़ के पीछे नदी में आए मलबे को हटाने में हुई देरी है। इसी देरी के कारण जून 2013 में आई बाढ़ ने उत्तरकाशी में भारी तबाही मचाई। इस मलबे को हटाने के लिए समाजसेवी संगठनों, राजनीतिक दलों तथा अन्य संगठनों ने मांग की थी, लेकिन सरकार की ओर से कोइर् पहल नहीं हुई जिसके कारण  मलबा नदी में जमा रहा जो भारी तबाही का कारण बना।

मुख्यमंत्री मानते हैं कि अब इस मलबे के न हटने के चूक  के कारण भयावहता बढ़ी है। देर से ही सही अब बाढ़ नियंत्रण के लिए सलाहकार की मदद ली जा रही है जिनकी सलाह पर उत्तरकाशी जनपद में काम भी शुरू हो गया है। इसी प्रकार पहले से ही आपदाग्रस्त क्षेत्र के रूप में चिन्हित स्थानों पर कार्य न होने के कारण यात्रा मार्ग 2 दर्जन स्थानों पर बाधित हुआ जिसके लिए कहीं न कहीं प्रबंध तंत्र द्वारा चूक की गई है।

चारधाम यात्रा मार्ग पर भी भूस्खलन की दृष्टि से बी.आर.ओ. द्वारा 2 दर्जन स्थान चिन्हित किए गए हैं इनमें लामबगड़ सहित सभी 24 संवेदनशील स्थान मलबे के चलते बंद न हो सकें, इसके लिए इन स्थानों पर 24 घंटे मलबा हटाने के लिए मशीनों का प्रबंध किया गया है। उन्होंने कहा कि लामबगड़ जैसे कि टिकल स्लाडिंग जोन में होने वाले भूस्खलन से निपटने के लिए नवीनतम तकनीक का प्रयोग किया जाएगा। कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए भी व्यवस्थाएं दुरुस्त की जा रही हैं।


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