जेल कैदी में बदलाव लाने की जगह

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Thursday, March 20, 2014-12:27 AM

नई दिल्ली : दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग ने आज कहा कि जेल किसी कैदी को सजा देने की व्यवस्था नहीं है, बल्कि अपराध के बारे में उसकी चेतना को जगाने और उसमें बदलाव लाने की जगह है, ताकि वह यहां से रिहा होने के बाद समाज में योगदान कर सके।  

  नजीब जंग तिहाड़ जेल में आयोजित दिल्ली की जेलों के स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे जहां वह मुख्य अतिथि थे। इस अवसर पर सेवानिवृत्त आई.ए.एस. अधिकारी जंग ने उन दिनों को याद किया जब वह 2 माह के लिए इंदौर में जेल के अधीक्षक थे।

उन्होंने कहा कि उन दिनों आराम था क्योंकि आपातकाल लागू था लेकिन वह अनुभव अच्छा था। मैंने यह सीखा कि  जेल में काम करना कितना  मुश्किल और शानदार होता है क्योंकि यह हर किसी के बस की बात नहीं है। नियमित पुलिस की नौकरी की तरह यह नौकरी मुश्किल है। इसमें एक और जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि आपको व्यक्ति की मानसिक स्थिति को भी समझना पड़ता है।


जंग ने इस बात को विशेष तौर पर रेखांकित किया कि भारत जैसे देश में, जो लोग अपराध करते हैं उन्हें संभवत: समाज, कानून या  सभ्यता ऐसा करने को मजबूर करती है। अपने शुरूआती दिनों में मैंने भिंड और मुरैना में काम किया, जहां लोग कड़े राजस्व कानूनों के कारण डकैत बन जाते हैं, ये कानून बेहद कड़े हैं। न्याय मिलने में इतनी देरी होती है कि लोग न्याय पाने के लिए अपराध करते हैं।


नजीब जंग ने कहा कि कोई भी जेल हो, मैं महसूस करता हूं कि यह दंड देने की व्यवस्था नहीं है, हालांकि सजा इसका एक हिस्सा जरूर है। असली बात यह है कि व्यक्ति द्वारा किए गए अपराध के बारे में उसकी चेतना को जगाया जाए और जब वह जेल से बाहर आए तो वह न केवल इसे महसूस करे, बल्कि वह यह भी जानता हो कि अपराध क्यों हुआ। उसे अपनी पिछली जिंदगी से यह एहसास हो, ताकि वह समझ सके कि कैसे वह जेल से बाहर आने के बाद समाज में योगदान कर
सकता है।


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