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UP: टिकट बंटवारे में अमित शाह ने खेला पिछड़ा कार्ड

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Thursday, March 20, 2014-2:37 PM

गाजीपुर/वाराणसी: भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के पिछड़ा होने का राग अलापने वाली भाजपा में उप्र में हो रहे टिकट बंटवारे में पिछड़ों का खास खयाल रखा जा रहा है। मोदी के सिपहसालार और उप्र मामलों के प्रभारी अमित शाह की रणनीति के तहत ही उप्र में अब तक घोषित 70 उम्मीदवारों में से दो दर्जन से अधिक पिछड़े वर्ग के उम्मीदवारों को टिकट दिया गया है।

प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से अब तक घोषित उम्मीदवारों में से एक तिहाई सीटें पिछड़े वर्ग के उम्मीदवारों को दी गई हैं। भाजपा के रणनीतिकार बताते हैं कि ऐसा इसलिए किया गया ताकि समाजवादी (सपा) पार्टी और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के वोट बैंक में सेंध लगाई जा सके। भाजपा सूत्रों के मुताबिक उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनने के बाद से ही अमित शाह की नजर पिछड़े और दलित वोट बैंक पर थी, जिसके तहत शाह ने प्रदेश से जुड़े कई दलित और पिछड़े वर्ग के नेताओं को पार्टी में लाने की कवायद बहुत पहले ही शुरू कर दी थी।

अब जब टिकटों की स्थिति लगभग साफ  हो गई है तब अमित शाह और उनकी टीम ने इस दिशा में काम करना शुरू कर दिया है कि प्रदेश की सर्वाधिक सीटें भाजपा की झोली में जाए। भाजपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पार्टी के कई नेताओं की नाराजगी के बावजूद अमित शाह के चहेते उम्मीदवारों को टिकट दिया गया है, जिनमें पिछड़े वर्ग के उम्मीदवारों की संख्या ज्यादा है। पदाधिकारी के मुताबिक प्रदेश में सर्वाधिक मतदाता पिछड़े वर्ग से ही आते हैं। इसलिए शाह की रणनीति थी कि पिछड़े वर्ग के ज्यादा से ज्यादा उम्मीदवारों को इस बार चुनावी मैदान में उतारा जाए।

उन्होंने बताया कि प्रदेश भाजपा के कई शीर्ष नेता अगड़ी जाति से आते हैं, लेकिन उनकी पसंद को दरकिनार कर शाह ने यह रणनीति अपनाई कि अगर भाजपा को प्रदेश से ज्यादा से ज्यादा सीटें दिलानी है तो पिछड़े वर्ग के वोट बैंक में सेंध लगानी होगी। वैसे भी पार्टी ने पिछड़ी जाति के कई नेताओं को भाजपा से जोडऩे में कामयाबी हासिल की है। प्रदेश में 52 प्रतिशत आबादी पिछड़े वर्ग की है। अब तक घोषित टिकटों में 20 से अधिक पिछड़े वर्ग के उम्मीदवारों को दिए गए हैं। सर्वाधिक भरोसा लोधी राजपूत समाज पर जताया गया है। इस समाज के सभी वरिष्ठ नेता मैदान में आ गए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के पुत्र राजबीर सिंह को एटा, साक्षी महाराज को उन्नाव से उम्मीदवार बनाना चौंकाने वाला निर्णय है।

उमा भारती की झांसी से उम्मीदवारी बुंदेलखंड में भाजपा की स्थिति सुधारने के उद्देश्य से की गई है, जबकि श्यामा चरण गुप्ता को इलाहाबाद से लड़ाया गया है। हालांकि सीटों के बंटवारे में कुर्मी, राजभर, मौर्य, सैनी, गुर्जर, कुशवाहा व नुनिया आदि को अपेक्षित भागीदारी न मिलने का गुस्सा है। कुर्मी व जाटों को तीन-तीन टिकट मिले लेकिन राजभर, कश्यप, यादव, गुर्जर व कुशवाहा का एक-एक उम्मीदवार बनाया है।


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