आखिर किससे नाराज थे पितामाह आडवाणी और क्यों?

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Friday, March 21, 2014-10:35 AM

नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी के वयोवृद्ध नेता लालकृष्ण आडवाणी ने गुरुवार को कहा कि उन्होंने गांधीनगर से ही चुनाव लडऩे का फैसला लिया है। पार्टी ने उन्हें गुजरात और भोपाल में से किसी एक का चुनाव करने का विकल्प दिया। गौरतलब है कि इससे पहले भाजपा के पितामह ने भोपाल से चुनावी समर में उतरने की जिद्द पकड़ी हुई थी और इस बात पर अड़ गए थे कि वे भोपाल से ही चुनाव लड़ेंगे। गांधीनगर से नाम घोषित होने पर आडवाणी नाराज हो गए और उन्हें मनाने के लिए भाजपा के कई वरिष्ठ नेता जुट गए।

 

नरेंद्र मोदी भी गुरुवार सुबह आडवाणी को मनाने पहुंचे पर सब व्यर्थ और फिर वहीं हुआ जो मोदी को पीएम इन वेटिंग घोषित होने पर हुआ था जीं हां संघ के एक फोन पर आडवाणी ने गांधी नगर से चुनाव लड़ने के लिए हामी भर दी। दो दिन के इस खेल में आखिर आडवाणी क्या साबित करना चेहते थे सभी के मन में यही सवाल हैं। आखिर बार-बार रुख बदलकर क्या आडवाणी पार्टी में अपना दबदबा बनाना चाहते थे या फिर वे पार्टी में अपनी अनदेखी से नाराज थे? 

 

पार्टी सूत्रों के अनुसार आडवाणी खुद ही गांधी नगर से चुनाव लड़ने के पक्ष में थे और उन्होंने गुजरात में सार्वजनिक तौर पर कहा था कि उनकी इच्छा गांधीनगर से चुनाव लड़ने की है। लेकिन जिस तरह से दूसरे दलों से नेताओं को पार्टी में लाने और उन्हें टिकट देने के बारे में उनकी अनदेखी की गई, उससे वे आहत थे क्योंकि वे अपने नाम छठी लिस्ट में आने से भी दुखी और  नाखुश थे। उनसे पहले पार्टी के सभी सीनियर नेताओं नरेन्द्र मोदी, मुरली मनोहर जोशी, अरुण जेटली, सुषमा स्वराज, नितिन गडकरी आदि की उम्मीदवारी का ऐलान किया जा चुका था।

 

वहीं आडवाणी की नाराजगी का दूसरा कारण था उनके नजदीकी नेताओं के टिकट काटने की कोशिशें। दरअसल, पार्टी में यह भी चर्चा होने लगी थी कि मोदी खुद अहमदाबाद की उसी सीट से चुनाव लड़ सकते हैं, जहां से हरिन पाठक सांसद हैं। हालांकि बुधवार को मोदी के लिए वड़ोदरा की सीट घोषित कर दी गई, लेकिन अपने समर्थकों के टिकट को लेकर भी उनकी नाराजगी बताई गई। कारण जो भी रहा हो लेकिन आडवाणी की नाराजगी से भाजपा एक बार फिर सहम गई थी और उन्हें मनाने की कवायदे तेज हो गई थी, आखिरकार आजवाणी ने फिर एक बार अपना बड़प्पन दिखाया और भाजपा के लिए भी  संकट से निकलने का रास्ता बन गया।


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