डी.एन.ए. रिपोर्ट बताएगी, कन्हैया किसका

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Saturday, March 22, 2014-11:50 AM

नई दिल्ली(मनीषा खत्री): श्रीकृष्ण लीला में भगवान कृष्ण के समान उस समय असमंजस की स्थिति पैदा हो गई थी,जब उनको पता चला था कि उसको जन्म देने वाली माता-पिता कोई और हैं और उसको पालने वाले कोई और। कुछ ऐसी ही स्थिति एक 11 साल के बच्चे के साथ भी हो गई है।

8 साल पहले यह बच्चा गायब हो गया था, जिसके बाद उसका लालन-पालन एक बिहार निवासी दंपत्ति ने किया। पंरतु अब उसके असली माता-पिता भी उसे वापिस पाने के लिए तरस रहे हैं,परंतु उसको पालने वाले माता-पिता उसे वापिस करने को तैयार नहीं हैं। जिस कारण यह मामला दिल्ली उच्च न्यायालय की शरण में पहुंच गया है। मात्र 3 साल की उम्र में गायब हुआ यह बच्चा यह बताने में भी अब नाकाम रहा है कि उसको जन्म देने का दावा करने वाले माता-पिता उसके असली माता-पिता है या नहीं।

जिसके कारण न्यायालय ने इस मामले में बच्चे का डी.एन.ए. कराने का आदेश दिए हैं। न्यायमूर्ति कैलाश गंभीर व न्यायमूर्ति सुनीता गुप्ता ने इस मामले में दिल्ली पुलिस को निर्देश दिए हंै कि वह मामले की जांच करके पता लगाए कि आखिर 3 साल का बच्चा दिल्ली से गायब होकर बिहार कैसे पहुंच गया। बच्चे को बिहार में पालने वाले दंपत्ति को जिस ओम प्रकाश उपाध्याय ने सौंपा था, उसने गुमशुदा बच्चे को पाने की शिकायत बिहार पुलिस को की थी या नहीं। अदालत ने मामले में पुलिस को बिहार के छपरा जिला की चाइल्ड वैल्फेयर कमेटी की उस रिपोर्ट को भी पेश करने के लिए कहा है, जिसके तहत बच्चा इस दंपत्ति को सौंपा गया था।

साथ ही पुलिस को कहा है कि जब तक बच्चे के डी.एन.ए. की रिपोर्ट नहीं आती है,तब तक बच्चे व उसको पालने वाले पिता के दिल्ली में रहने की व्यवस्था की जाए। अब इस मामले में 22 अप्रैल को सुनवाई होगी।दरअसल डाबड़ी निवासी एक व्यक्ति के घर 11 साल पहले चार बेटियों के बाद एक बेटा पैदा हुआ था।

लगभग 8 साल पहले उनका यह बेटा अचानक उनके घर से गायब हो गया। उन्होंने बच्चे को काफी खोजा परंतु वह नहीं मिला। डाबड़ी थाने में शिकायत दर्ज कराई गई। भाग्यवश बच्चा किसी अनजान के हाथों के जरिए बिहार के छपरा जिले में पहुंच गया। वहां पर ओम प्रकाश उपाध्याय नामक व्यक्ति को जब यह बच्चा मिला तो उसने एक दंपत्ति को बच्चा सौंप दिया। इस दंपत्ति ने अपनी 3 बेटियों व एक बेटे के साथ-साथ इस बच्चे का पालन-पोषण भी अपनी संतान की तरह किया है।

अब किसी व्यक्ति ने डाबड़ी निवासी को बताया कि उसका बच्चा बिहार में है, जिसके बाद उन्होंने बिहार जाकर बच्चे की छाती पर जन्मजात निशान को देखकर उसे पहचान लिया। परंतु बिहार दंपत्ति ने बच्चा वापिस देने से इंकार कर दिया, इसलिए मामला अब उच्च न्यायालय में पहुंच गया। डाबड़ी निवासी व्यक्ति का कहना है कि वह अपने बच्चे को पाने के लिए डी.एन.ए. टैस्ट कराने को तैयार है।


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