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छत्तीसगढ़ : कलेक्टर से लेकर किसान तक बनें उम्मीदवार

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Monday, March 24, 2014-11:21 AM

रायपुर: छत्तीसगढ़ में कई लोकसभा सीटों पर चुनाव इस बार रोचक होने के आसार हैं। कहीं पर सिपाही रहे नेता का कलेक्टर से तो कहीं पर गृहिणी का मुकाबला डाक्टर से है। कई प्रत्याशी उच्च शिक्षा प्राप्त हैं तो कोई हाईयर सेकेंडरी तक ही पढ़ा है। किसी का व्यवसाय वकालत है तो कोई किसान है। हाईप्रोफाइल महामसुंद लोकसभा सीट से चुनाव लड़ रहे पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी रहे हैं। वे पूर्व में रायपुर में इंजीनियरिंग कालेज में शिक्षक थे। कलेक्टरी छोड़कर वे राजनीति में आए।

उनके खिलाफ भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे चंदूलाल साहू पेशे से किसान हैं, लेकिन रेलवे पुलिस में नौकरी कर चुके हैं। वे एलएलबी तक पढ़े-लिखे हैं। कोरबा के सांसद डॉ. चरणदास महंत पीएचडी हैं। उन्होंने एमएससीए एमए और एलएलबी के साथ पीएचडी की है। उन्हें भी राजनीति विरासत में मिली। उनके पिता बिसाहू दास महंत राजनीति में थे। उनके खिलाफ भाजपा के टिकट पर लड़ रहे डॉ. बंशीलाल महतो बीएएमएस (गोल्ड मेडलिस्ट) आयुर्वेद डाक्टर हैं। रायपुर आयुर्वेदिक कालेज में वर्तमान मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के सीनियर थे। बिलासपुर से भाजपा प्रत्याशी लखनलाल साहू पेशे से वकील हैं। एलएलबी तक पढ़े हैं। करुणा शुक्ला एमए पास हैं। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की भतीजी होने की वजह से वे राजनीतिक पृष्ठभूमि वाली हैं।

सरगुजा से चुनावी मैदान में उतरे भाजपा के कमलभान सिंह विधायक रह चुके हैं यानी उनका राजनीतिक पृष्ठभूमि हैं। एमए तक पढ़े सिंह पेशे से किसान हैं। उनके विरोधी कांग्रेस के रामदेव राम हालांकि मैट्रिक तक ही पढ़े हैं, लेकिन वे भी राजनीतिक परिवार से हैं। उनके पिता दो दफे विधायक रह चुके हैं। रायगढ़ से चुनाव लड़ रहे विष्णुदेव साय का कालेज की पढ़ाई छोड़कर पंचायत चुनाव से राजनीति सफर शुरू हो गया था। खेती-किसानी से जुड़े साय को कांग्रेस की आरती सिंह टक्कर दे रही हैं। आरती के पिता रामपुकार सिंह पत्थलगांव से छह बार विधायक रह चुके हैं। वे एमए तक पढ़ी हैं।

रायपुर से सांसद रमेश बैस मैट्रिक उत्तीर्ण हैं और किसानी से जुड़े हैं। उन्होंने पार्षद से राजनीतिक सफर शुरू किया और सातवीं बार सांसद का चुनाव लड़ रहे हैं। उनके खाते में दो सगे भाइयों की जोड़ी को हराने का दोहरा रिकार्ड है। उन्होंने कांग्रेस के दिग्गज विद्याचरण शुक्ल और श्यामाचरण शुक्ल को हराया तो धनेंद्र साहू और जुगल किशोर साहू को भी हराकर रिकार्ड बनाया है। उनके खिलाफ कांग्रेस से छाया वर्मा हैं जो पहले आयुर्वेद रत्न होने की वजह से लोगों का इलाज भी करती रहीं। वे इकॉनामिक्स में एमए भी हैं।

राजनांदगांव से भाजपा उम्मीदवार अभिषेक सिंह को राजनीतिक विरासत में मिली है। उन्होंने इंजीनियरिंग के बाद एमबीए भी किया है। अभिषेक ने मुंबई सिटी बैंक की बड़ी नौकरी छोड़कर छत्तीसगढ़ में काम करना पसंद किया। पिता डॉ. रमन सिंह मुख्यमंत्री हैं। अभिषेक शिक्षा संस्थान भी चलाते हैं। उनके प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के कमलेश्वर वर्मा बीकॉम व एलएलबी हैं। दुर्ग सांसद सरोज पांडेय पहले भाई के डेयरी व्यवसाय में सहयोग करती थीं। एमएससी पीएचडी सरोज का मुकाबला हाईयर सेकेंडरी तक पढ़े पूर्व मंत्री ताम्रध्वज साहू से है। वे किसानी करते हैं।

कांकेर में गृहिणी से नेता बनी फूलो देवी नेताम हाईयर सेकेंडरी उत्तीर्ण हैं। उनका मुकाबला पूर्व मंत्री व कभी शिक्षक रहे विक्रम उसेंडी से है। उसेंडी बीएससी हैं और वे खेती करते हैं। जांजगीर से भाजपा की कमला पाटले राजनीति में आने से पहले घर में चूल्हा चौका संभालती थीं। बीए तक शिक्षित कमला के खिलाफ कांग्रेस के प्रेमचंद जायसी हैं जो सहायक पशु चिकित्सक रह चुके हैं। वे एमए व एमबीए भी हैं। बस्तर से सांसद दिनेश कश्यप एमए हैं तो दीपक कर्मा बीए हैं। दिनेश बस्तर के कश्यप परिवार से हैं जिसे राजनीति में हर कोई जानता है। उनके प्रतिद्वंद्वी दीपक कर्मा पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा के बेटे हैं। दीपक बीए हैं और खेती-किसानी करते है।


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