दिखावा है भाजपा का मुस्लिम प्रेम

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Friday, March 28, 2014-2:37 PM

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की 80 सीटों में से एक भी मुस्लिम को भाजपा ने नहीं दिया टिकट-
हाल ही में भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने जब यह कहा कि अगर गलती हुई है तो हम मुसलमान भाइयों से सिर झुका कर माफी मांगते हैं, तब लगा कि शायद पार्टी अपनी सोच में बदलाव ला रही है। लेकिन, अगर देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में टिकटों के बटवारे को देखें तो यह सही नहीं लगता। ऐसा इसलिए क्योंकि इस प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से पार्टी ने एक भी मुस्लिम उम्मीदवार पर भरोसा नहीं जताया है। भाजपा के उपाध्यक्ष और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का कहना है कि पार्टी ने जीतने वाले प्रत्याशियों को चुना है।

उनका मानना है कि अगर मुसलमान को टिकट दिया जाता है तो मुसलमान ही उस उम्मीदवार को इसलिए वोट नहीं देते क्योंकि वह भाजपा से चुनाव लड़ रहा है। दूसरी ओर, बाकी पार्टियों ने इस बार मुस्लिमों को काफी प्राथमिकता दी है। मुस्लिमों को सबसे ज्यादा टिकट बहुजन समाज पार्टी ने और उसके बाद आम आदमी पार्टी ने दिए हैं। बसपा ने जातिगत समीकरणों को वरीयता देते सबसे ज्यादा 19 प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है, जो इस राज्य में उतारे गए कुल उम्मीदवारों का करीब 24 फीसदी है।

दूसरे नंबर पर आम आदमी पार्टी ने 16 मुस्लिम प्रत्याशियों को मौका दिया है। भाजपा का तो मुस्लिमों से परहेज समझ में आता है लेकिन मुस्लिमों के हक की सबसे ज्यादा बात करने वाली समाजवादी पार्टी ने भी राज्य में सिर्फ 13 मुस्लिम प्रत्याशियों को ही मौका दिया। कांग्रेस का रिकॉर्ड भी इस मामले में खराब है। उसने भी कम मुस्लिम प्रत्याशी यू.पी. में उतारे हैं। ऐसा तब है जब राज्य में कुछ लोकसभा क्षेत्र में तो मुस्लिम आबादी कुल मतदाताओं की 17 से 18  फीसदी तक है। कुछ ऐसी भी सीटें हैं, जहां मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 20 फीसदी के करीब है।


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