हरियाणा में विपक्ष के बिखराव से कांग्रेस के हौसले बुलंद

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Saturday, March 29, 2014-1:54 PM

नई दिल्ली (विशेष): हालांकि कांग्रेस पूरे देश में सत्ता विरोधी लहर का सामना कर रही है लेकिन हरियाणा में कांग्रेस के हौसले बुलंद हैं। इस छोटे से राज्य में कांग्रेस इसलिए मजबूत नहीं है कि वहां पार्टी ने कोई अच्छा काम किया है बल्कि यह इसलिए है कि यहां विपक्ष कमजोर और बिखरा हुआ है।

राज्य की तीनों बड़ी विपक्षी पार्टियों में बिखराव चरम पर है। चाहे वह भाजपा हो या हजकां या इनैलो, सब में बिखराव है। यद्यपि भाजपा ने पूर्व मुख्यमंत्री भजन लाल के बेटे कुलदीप बिश्नोई की पार्टी हरियाणा जनहित पार्टी से औपचारिक रूप से गठबंधन किया है लेकिन उसकी नजदीकियां ओमप्रकाश चौटाला से बढ़ रही हैं। भाजपा, हजकां और इनैलो के इन पेचीदा संबंधों का असर पड़ोसी राज्य पंजाब पर भी पड़ रहा है। प्रकाश सिंह बादल के चौटाला के साथ आपातकाल के समय से बहुत ही नजदीकी संबंध हैं। उपप्रधानमंत्री चौधरी देवी लाल ने इन दोनों परिवारों को नजदीक लाने में अहम भूमिका निभाई।

बादल ने भाजपा को इनैलो के साथ गठबंधन करने का दबाव बनाया पर सुषमा के विरोध के चलते पार्टी ने हजकां के साथ गठबंधन किया। इस गठबंधन पर दोनों दलों के न केवल नेता असमंजस में हैं बल्कि कार्यकर्त्ता भी ऊहापोह की स्थिति में हैं। विपक्ष में जो असमंजस व्याप्त है राज्य कांग्रेस को इसी का बड़ा फायदा मिलता दिख रहा है। 2009 में पार्टी ने 10 में से 9 सीटें जीती थीं, केवल हिसार की सीट ही भजन लाल जीते थे। 2011 में उनकी मौत के बाद उनके बेटे ने मध्यावधि चुनावों में ओमप्रकाश चौटाला के बेटे अजय को मात्र 6,300 मतों के नजदीकी अंतर से मात दी थी। हालांकि मौजूदा समय में मुकाबला पहले जैसा आसान नहीं है।

इस बार बिश्नोई के सामने अजय चौटाला के बेटे दुष्यंत तगड़ी चुनौती पेश कर रहे हैं। कांग्रेस ने इस सीट पर चौटाला के नजदीकी रहे संपत सिंह को उतारा है लेकिन इस सीट पर कांग्रेस की स्थिति अच्छी नहीं है। पिछले साल से ओ.पी. चौटाला और उनके बेटे अजय चौटाला जेल में हैं इसलिए उनकी पार्टी को कुछ हद तक सहानुभूति वोट मिलने के भी आसार हैं। कांग्रेस दीपेंद्र हुड्डा की सीट रोहतक नवीन जिंदल की कुरुक्षेत्र, श्रुति चौधरी की भवानी-महेंद्रगढ़ और अरविंद शर्मा की करनाल सीट पर मजबूत दिख रही है।

फरीदाबाद से मौजूदा सांसद अवतार सिंह ने अपनी साख काफी हद तक मजबूत कर ली है। केजरीवाल द्वारा उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाने के बाद उनकी साख को काफी धक्का लगा था। इस सीट पर शहरी मतदाताओं की तादात अच्छी-खासी है जो ‘आप’ की तरफ जा सकते हैं। भाजपा ने यहां से गुर्जर समुदाय से संबंधित उम्मीदवार को उतारा है। उल्लेखनीय है कि वह स्वयं भी इसी समुदाय से हैं लेकिन अवतार सिंह को हमेशा व्यापारी वर्ग का काफी समर्थन मिलता रहा है।

गुडग़ांव सीट पर भाजपा और ‘आप’ के यादवों के बीच जबरदस्त टक्कर के आसार हैं। सोनीपत सीट, जो जाट बाहुल्य है, से भाजपा ने ब्राह्मण उम्मीदवार रमेश कौशिक को उतारा है जिससे पार्टी के नेता प्रदीप सांगवान, जो स्वयं एक जाट हैं, ने नाराज हो कर कांग्रेस का दामन थाम लिया है जिससे भाजपा को नुक्सान की आशंका है। सिरसा और अंबाला की आरक्षित सीटों पर भी रोचक मुकाबले के आसार हैं।

सिरसा से कांग्रेस उम्मीदवार अशोक के भाग्य का फैसला डेरा सच्चा सौदा के अनुयायियों पर निर्भर करेगा। कुल मिला कर राज्य में 7 से 8 सीटें ऐसी हैं जहां कांग्रेस जीत हासिल कर सकती है।


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