छत्तीसगढ में एक बार फिर रमन सिंह के सामने दोहरी चुनौती

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Saturday, March 29, 2014-3:16 PM

रायपुर: छत्तीसगढ़ में पिछले दो लोकसभा चुनावों में देश में विपरीत माहौल के बाद भी 11 में 10 सीटों पर विजय दिलवाने वाले मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह के सामने इस बार भी यह परिणाम दोहराने की चुनौती है। राज्य में 2003 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सत्ता में आने के बाद पहली बार 2004 में लोकसभा चुनाव हुए। उस समय भाजपा के खिलाफ देश में माहौल था। मुख्यमंत्री डा. सिंह ने प्रचार की स्वयं कमान संभाली और 11 में 10 सीटों पर भाजपा को जीत हासिल हुई1राज्य की केवल एक सीट महासमुन्द में कांग्रेस प्रत्याशी पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी को ही जीत हासिल हो सकी।

दूसरी बार लोकसभा चुनाव 2009 में हुए। देशभर में इस बार कांग्रेस नेतृत्व वाले संयुक्त प्रगतिशील गठबन्धन(संप्रग) के पक्ष में माहौल था पर छत्तीसगढ में इसके विपरीत चौंकांने वाले परिणाम आए। इस बार भी भाजपा को 11में 10 सीटों पर जीत हासिल हुई। कांग्रेस को इस बार भी केवल एक सीट कोरबा में जीत मिली।  राज्य में इस बार फिर भाजपा के सामने पिछला परिणाम दोहराने की चेतावनी है। मुख्यमंत्री डा. सिंह ने इस बार राज्य की सभी 11 लोकसभा सीटों पर भाजपा के जीत हासिल करने का दावा किया है। इसके लिए वह लगातार प्रयास भी कर रहे है पर कई सीटों पर भाजपा प्रत्याशियों को मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस की कडी चुनौती से जूझना पड रहा है।

भाजपा ने पिछले दो लोकसभा चुनावों में यह शानदार सफलता तब अर्जित की जबकि इसके कुछ माह ही पहले हुए विधानसभा चुनावों में उसे कांग्रेस कीओर करारी टक्कर मिली थी। चार माह पहले राज्य में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस एवं भाजपा के बीच मतों का अन्तर पौन प्रतिशत से ही कम रह गया है इस कारण इस बार चुनौती कुछ ज्यादा ही लग रही है। वैसे विधानसभा चुनावों के विपरीत राज्य में लोग लोकसभा चुनावों में मतदान करते रहे है। वर्ष 2004 के लोकसभा चुनावों में भाजपा को 47.78 प्रतिशत मत हासिल हुए थे जबकि कांग्रेस को 40.16 प्रतिशत मत मिले थेे। वहीं 2003के विधानसभा चुनावों में दोनो पाॢटयों के बीच मतों का अन्तर दो प्रतिशत ही था।

वर्ष 2009 के लोकसभा चुनावों में भाजपा को 45.27 प्रतिशत मत हासिल हुए थे वहींं कांछसे को 37.07 प्रतिशत मत हासिल हुए थे। इस बार भाजपा को कांग्रेस से आठ प्रतिशत से अधिक मत हासिल हुए। यह एक रिकार्ड भी था। जबकि 2008 के विधानसभा चुनाव में दोनो दलों के मतों में लगभग डेढ प्रतिशत का ही अन्तर था। लगभग चार माह पूर्व हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने हालांकि हैट्रिक बनाई लेकिन उसे इस बार कांग्रेस से कहीं ज्यादा चुनौती मिली। भाजपा की जहां एक सीट कम हो गई वहीं मत प्रतिशत में भी कमी हुई और अन्तर पौन प्रतिशत से कम रह गया। भाजपा को सर्वाधिक बस्तर एवं सरगुजा में कांग्रेस ने टक्कर दी।


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