वाहनों में नहीं लगा जी.पी.एस.

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Saturday, March 29, 2014-3:14 PM
नई दिल्ली (कार्तिकेय हरबोला): दिल्ली की सड़कों पर दौड़ रहे सार्वजनिक वाहनों में ग्लोबल पोजिशिनिंग सिस्टम (जी.पी.एस.) लगाने की योजना फ्लॉप साबित हो रही है। आलम यह है कि 100 में से 50 से ज्यादा वाहन वर्तमान में बिना जी.पी.एस. के सड़कों पर दौड़ रहे हैं। पश्चिमी दिल्ली में तो हर दूसरी गाड़ी बिना जी.पी.एस. के चल रही है। गौरतलब है कि जीपीएस सिस्टम लगाने व उसकी निगरानी का जिम्मा डिम्ट्स (दिल्ली इंटीग्रेटेड मल्टी मॉडल ट्रांजिट सिस्टम) के पास है।
 
पश्चिमी दिल्ली के ग्रामीण इलाकों में बने डी.टी.सी. डिपो में सबसे ज्यादा पुरानी स्टैंडर्ड फ्लोर बसें हैं। इनके परिचालन की सीमा भी लगभग समाप्त है। बावजूद विभाग इनका परिचालन कर रहा है। अक्सर ये बसें रास्तों पर खराब हो जाती हैं, जिसका खामियाजा यात्रियों को उठाना पड़ता है। डिम्ट्स अधिकारियों ने बताया कि पुरानी स्टैंडर्ड फ्लोर की एक भी बस में जी.पी.एस. नहीं लगा है।
 
साथ ही 55 हजार ऑटो रिक्शा व काली पीली टैक्सियों में भी जी.पी.एस. नहीं लग पाया है। वहीं, कलस्टर सेवा की मात्र 1554 और डी.टी.सी. की 3956 लो-फ्लोर बसों में जी.पी.एस. लगा है। जी.पी.एस. होने का बड़ा फायदा यह है कि बस चालक मनमानी नहीं कर सकते। डिपो से बाहर सड़क पर निकलते ही कौन बस कहां है, इसका पता लगाया जा सकता है। इसके अलावा किस बस स्टॉप पर कौन सी बस कितनी देर में पहुंचेगी। इसकी सटीक जानकारी यात्रियों की दी जा सकेगी।
 
केंद्रीय राजमार्ग व सड़क परिवहन मंत्रालय ने देश के सभी 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में चलने वाली सार्वजनिक गाडिय़ों में अनिवार्य रूप से जी.पी.एस. लगाने का आदेश दिया था। 

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