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चुनाव अधिकारी कार्यालय की कार्यशैली पर उठे सवाल

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Sunday, March 30, 2014-12:29 AM

चंडीगढ़(भुल्लर): पिछले लोकसभा व विधानसभा चुनाव के समय पंजाब के चुनाव अधिकारी कार्यालय का सभी राजनीतिक पार्टियों व सरकार के बड़े अधिकारियों पर जबरदस्त प्रभाव देखा जाता था परंतु इस बार चुनाव अधिकारी कार्यालय की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। मुख्य चुनाव अधिकारी वी.के. सिंह शुरू से ही कांग्रेस के निशाने पर हैं और पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेंद्र सिंह पिछले दिनों चंडीगढ़ में प्रैस कांफ्रैंस के अलावा अन्य कई कार्यक्रमों के दौरान मुख्य चुनाव अधिकारी पर तीखे प्रहार करते हुए उन पर अकाली-भाजपा के प्रभाव में कार्य करने के आरोप लगा चुके हैं।

उल्लेखनीय है कि चुनाव तिथियां घोषित होने पर आचार संहिता लागू होने के बाद अरुण जेतली के रोड शो को छोड़कर अब तक आई अधिकतर शिकायतों में क्लीन चिट दी गई है। जांच अधिकारियों की रिपोर्ट्स में से कइयों को तो चुनाव आयोग ने स्वीकार ही नहीं किया और सही ढंग से जांच कर दोबारा रिपोर्ट्स मंगवाई हैं। कुछ शिकायतों में क्लीन चिट के बावजूद आयोग ने कार्रवाई की है। इनमें आटा-दाल योजना के तहत 6 माह के इकट्ठे वितरित किए जा रहे राशन पर रोक तथा अकाली विधायक बीबी जागीर कौर द्वारा अनधिकृत तौर पर रखे शिलान्यास के मामले शामिल हैं जबकि राज्य चुनाव अधिकारी द्वारा जिला अधिकारियों के माध्यम से करवाई गई जांच में आई क्लीनचिट की रिपोर्टें आयोग को भेजी गई थीं।

क्लीन चिट वाली रिपोर्टों में शिकायत को नजर अंदाज किए जाने का भी आयोग ने नोटिस लेते हुए रिपोर्ट भेजने से पहले उनसे बात करने की हिदायत दी है। राज्य चुनाव अधिकारी कार्यालय की कार्यशैली पर इसलिए भी सवाल उठ रहे हैं कि 24 या 48 घंटों में मांगी गई रिपोर्टें एक सप्ताह तक भी नहीं भेजी गईं। निचले अधिकारियों को भी आयोग का ज्यादा भय नहीं दिखाई दे रहा और रिपोर्ट गृह सचिव से मांगी गई परंतु उसने खुद रिपोर्ट भेजने की जगह ए.डी.जी.पी. के माध्यम से आयोग को जवाब भिजवा दिया। इन रिपोर्ट्स को भी आयोग ने गृह सचिव के कमैंट सहित भेजने के लिए वापस लौटाया और ये शिकायतें कई जिलों के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ थीं।


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