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जो काम करे उस सांसद का इंतजार

  • जो काम करे उस सांसद का इंतजार
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Sunday, March 30, 2014-11:11 AM
नई दिल्ली : दक्षिण दिल्ली क्षेत्र की बात छिड़ते ही इलाके के पॉश इलाके दिमाग में कौंधने लगते हैं लेकिन वैभव व खूबसूरती के पीछे का स्याह पक्ष किसी से छिपा नहीं है। इस संसदीय क्षेत्र के एक बड़े इलाके में ऊबड़-खाबड़ सड़कें, बिजली व पानी की बड़ी समस्याएं हैं। 17 लाख से ज्यादा मतदाताओं को लोकसभा चुनाव में ऐसे सांसद का आज भी इंतजार है, जो यहां की जमीनी समस्याओं का समाधान कराए।
 
अब इस संसदीय क्षेत्र में पानी की किल्लत, अवैध कालोनियों को वैध कराना, टूटी सड़कें तथा इलाके में स्कूल, अस्पताल व बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराना सबसे अहम चुनावी मुद्दे हो गए हैं। पिछले डेढ़ दशक में वोटर प्रोफाइल बदलने से दक्षिण दिल्ली जैसा पॉश इलाका भी कई समस्याओं से घिर गया है। यही वजह है कि इस लोकसभा सीट की चुनावी जंग दिलचस्प हो गई है।
 
हालांकि, यहां से एक दर्जन से ज्यादा प्रत्याशी मैदान में हैं, मगर मुख्य लड़ाई कांग्रेस, भाजपा और आप के बीच दिख रही है। तीनों के लिए यह सीट प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सज्जन कुमार ने अपने भाई और कांग्रेस उम्मीदवार रमेश कुमार को लगातार दूसरी बार जिताने के लिए एक बार फिर एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया है। वह न सिर्फ हर कदम पर खुद रमेश कुमार के साथ हैं, बल्कि मिलनसार होने की अपनी खासियत का भी लाभ उठा रहे हैं। वह इलाके के उन पार्टी नेताओं को भी रमेश के समर्थन में एक मंच पर लाने में कामयाब हो गए हैं, जिनमें मनमुटाव की बात की जा रही थी।
 
इसके बावजूद पब्लिक में स्थानीय सांसद को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। पब्लिक की सबसे बड़ी नाराजगी इस बात को लेकर है कि चुनाव जीतने के बाद रमेश एक बार भी इलाके में नजर नहीं आए। अगर जातीय समीकरण देखें तो यहां पंजाबी, ओ.बी.सी., एस.सी., जाट, गुर्जर व ब्राह्मण वोटरों की संख्या सबसे ज्यादा है। रमेश जाट बिरादरी से हैं, इसलिए जातिगत आधार और सज्जन कुमार की छवि का फिर लाभ उठाने की कोशिश में हैं। दूसरी तरफ, इलाके में करीब डेढ़ दर्जन गांव गुर्जर बिरादरी के होने के कारण भाजपा ने अपने दबंग गुर्जर विधायक रमेश बिधूड़ी पर फिर दांव खेला है।

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