38% दिल्लीवालों के लिए ईमानदार हैं अरविंद

  • 38% दिल्लीवालों के लिए ईमानदार हैं अरविंद
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Tuesday, April 01, 2014-10:19 AM
नई दिल्ली :दिल्ली में आम आदमी पार्टी (आप) व पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल का ग्राफ भले ही गिरा हो लेकिन अभी भी केजरीवाल को चाहने वालों की कोई कमी नहीं है। सर्वे के मुताबिक दिल्ली की सातों सीटों पर हुए एक सर्वें के मुताबिक दिल्ली की 38 फीसदी जनता केजरीवाल को ईमानदार व्यक्ति और ईमानदार पार्टी मानती है। 
 
सिर्फ 13 फीसदी लोग ऐसे हैं जो केजरीवाल को सत्ता का लालची बताते हैं। 12 फीसदी लोग ऐसे हैं जो केजरीवाल को नौटंकी बाज बताते हैं लेकिन जिस तरह उन्होंने दिल्ली की कुर्सी को बीच मझधार में छोड़ चलते उसके आधार पर 37 फीसदी लोग केजरीवाल को गैरजिम्मेदार यानी जिम्मेदारी से भागने वाला व्यक्ति कह रहे हैं। कुल मिलाकर 60 फीसदी लोग ऐसे हैं जिन्होंने केजरीवाल को भगोड़ा, बेईमान, सत्ता का लालची जैसे शब्द कहकर नकार दिया है। उनका कहना है कि केजरीवाल को दिल्ली की जनता के लिए काम करने का मौका मिला था लेकिन वह बीच में ही भाग खड़े हुए।
 
दिल्ली की जनता का कहना है कि कांग्रेस और भाजपा दोनों बड़ी पार्टियो ने देश की जनता को छला है। गरीब और बेरोजगार जनता पार्टियों को इस आस से वोट देती है कि वह सत्ता में आने के बाद उनके लिए कुछ करेंगे लेकिन वह सत्ता में आने के बाद गरीब व बेरोजगारों के लिए काम करने के बाजए उनका दमन करना शुरू कर देती हैं लेकिन दिल्ली में आम आदमी पार्टी ऐसी रही जिसने गरीबों की न सिर्फ बात की बल्कि उनके हकों के लिए आवाज भी उठाई। सत्ता में आने के बाद उन्होंने गरीब जनता के लिए काम भी करके दिखाया।
 
केजरीवाल ने मंहगे बिजली के बिलों, पानी की समस्या, महंगाई व बेरोजगारी जैसे गरीबों के मुद्दों को गर्मजोशी के साथ उठाया। मगर कहीं आम आदमी पार्टी अन्य पार्टियों का न निगल जाए इसलिए अन्य पार्टियों ने मिलकर आप को दबाने का प्रयास किया। हालात यह हो गए कि पार्टी को सत्ता छोड़कर जाना पड़ा। दिल्ली में ऐसे भी लोग मिले जो केजरीवाल को नौटंकीबाज कहते नजर आए। उनका कहना है कि केजरीवाल को सिर्फ नौटंकी करनी आती है। दिल्ली का मुख्यमंत्री होने के बावजूद ऐसी क्या जरूरत थी कि केजरीवाल को सड़क पर अनशन पर बैठना पड़ा। जबकि वह इस नौटंकी के बजाए अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर सकते थे। जनता के लिए काम करने के बाजए एक बहाना ढूंडकर सत्ता छोड़कर निकल जाना पर एक बड़ा ड्रामा था। उन्होंने किस जब सत्ता नहीं संभाल सके तो दिल्ली को बीच में ही छोड़ भाग निकले।  कम लोग हैं जिन्होंने केजरीवाल को सत्ता का लालची माना। 

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