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दिल्ली में हर सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला

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Tuesday, April 01, 2014-8:56 PM

नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी में लोकसभा चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और सभी पार्टियां चुनाव प्रचार में जोरशोर से लगी हुई हैं। कुल 150 प्रत्याशी चुनाव मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। पहली बार आम आदमी पार्टी (आप) के लोकसभा चुनाव में उतरने से यहां हर सीट पर मुकाबला त्रिकोणीय और दिलचस्प हो गया है। राजधानी की सात संसदीय सीटों के लिए कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और विधानसभा चुनाव में जीत से उत्साहित आप के बीच मुख्य मुकाबला है। हालांकि, यहां बहुजन समाज पार्टी (बसपा), राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) का घटक शिवसेना और तृणमूल कांग्रेस सहित लगभग 25 क्षेत्रीय पार्टियों के उम्मीदवार भी चुनाव मैदान में हैं। बसपा ने जहां सभी सात सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए हैं, वहीं तृणमूल कांग्रेस ने पांच और शिवसेना ने तीन उम्मीदवार खड़े किए हैं।


58 निर्दलीय सहित 150 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं, जिनमें 10 महिला उम्मीदवार भी शामिल हैं। मतदान 10 अप्रैल को होना है।वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच था, जिसमें कांग्रेस के सभी प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की थी। मगर इस बार राजधानी में अरविंद केजरीवाल नीति आप विधानसभा चुनाव के बाद लोकसभा चुनाव में भी इन दोनों पार्टियों को कड़ी टक्कर देती दिख रही है। अब जरा सातों सीटों पर कांग्रेस, भाजपा और आप के उम्मीदवारों पर गौर करते हैं। पूर्वी दिल्ली से भाजपा ने महेश गिरि, आप ने महात्मा गांधी के पौत्र राजमोहन गांधी और कांग्रेस ने मौजूदा सांसद संदीप दीक्षित को टिकट दिया है।

संदीप पूर्व मुख्यमंत्री और अब केरल की राज्यपाल शीला दीक्षित के बेटे हैं। राजमोहन 1989 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के खिलाफ अमेठी सीट से चुनाव लड़ चुके हैं।दक्षिण दिल्ली से भाजपा के रमेश बिधूड़ी, आप के कर्नल देवेंद्र सिंह शेहरावत और कांग्रेस के रमेश कुमार किस्मत आजमा रहे हैं। पश्चिमी दिल्ली में आप की तरफ से पूर्व पत्रकार जरनैल सिंह, भाजपा से पूर्व मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा के बेटे प्रवेश वर्मा और कांग्रेस से महाबल मिश्रा के बीच मुकाबला है।उत्तर पश्चिम दिल्ली से भाजपा की तरफ से नए सहयोगी उदित राज, कांग्रेस की मौजूदा सांसद कृष्णा तीरथ और आप की तरफ से दिल्ली की पूर्व मंत्री राखी बिड़ला को टिकट दिया गया है।

नई दिल्ली सीट पर भाजपा की प्रवक्ता मीनाक्षी लेखी, आप की तरफ से पत्रकार आशीष खेतान और कांग्रेस की तरफ से मौजूदा सांसद अजय माकन मैदान में हैं। उत्तर पूर्वी दिल्ली से आप की तरफ से प्रो.आनंद कुमार, कांग्रेस से मौजूदा सांसद जयप्रकाश अग्रवाल और भाजपा की तरफ से भोजपुरी फिल्मों के अभिनेता मनोज तिवारी चुनावी मैदान में हैं। मनोज दूसरी बार लोकसभा चुनाव में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। चांदनी चौक सीट पर पूर्व टेलीविजन पत्रकार आशुतोष, निवर्तमान सांसद कपिल सिब्बल और भाजपा के हर्षवर्धन के बीच मुकाबला है।

चुनाव में इनकी दावेदारी की बात करें तो राजनीतिक विश्लेषक  मानते हैं कि आप की विधानसभा में हुई जीत का असर लोकसभा में भी देखने को मिलेगा और इसके पारंपरिक वोटर खास कर मध्य और निम्न व गरीब तबके के लोग मजबूती के साथ इससे जुड़े हुए हैं।‘सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसायटी’ में राजनीतिक विश्लेषक अभय कुमार दुबे कहते हैं, ‘‘दिल्ली में सीधे तौर पर त्रिकोणीय संघर्ष है और इसमें आप की दावेदारी मजबूत है। मध्य और निम्न वर्ग के वोटर अभी इसके साथ मजबूती के साथ खड़े हैं।’’अभय दुबे हालांकि पिछले विधानसभा चुनाव में करारी हार झेलने वाली कांग्रेस की दावेदारी को पूरी तरह से नहीं नकारते। उन्होंने कहा, ‘‘विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव के समीकरण अलग होते हैं और कांग्रेस के पुराने वोटर उसके पास लौट सकते हैं।’’

दिल्ली में महिलाओं की दावेदारी की बात करें, तो यह बात बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस राज्य ने सुचेता कृपालानी, मीरा कुमार, सुभद्रा जोशी और सुषमा स्वराज जैसी कद्दावर नेताओं को कभी संसद भेजा था, उसी राज्य में आज मात्र 10 महिला उम्मीदवार हैं, जो कुल उम्मीदवारों का 10 फीसदी भी नहीं है। तीनों प्रमुख पार्टियों ने एक-एक महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया है, शेष सात महिलाएं या तो निर्दलीय हैं या छोटी पार्टियों से हैं। कांग्रेस की रेणुका चौधरी ने इस बारे में कहा, ‘‘कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने महिलाओं को 50 फीसदी भागीदारी की बात की है। पार्टी अध्यक्ष सोनिया गंाधी ने भी कहा है कि महिलाओं को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

हमने हर चुनाव में महिलाओं की संख्या बढ़ाई है, लेकिन उनकी भागीदारी बहुत नहीं बढ़ी है। पार्टी में क्या तय होता है, यह मैं नहीं कह सकती।’’ रेणुका इसके लिए महिला आरक्षण विधेयक के पारित न होने को भी जिम्मेदार ठहराती हैं।लेकिन भाजपा की प्रवक्ता निर्मला सीतारमण इस सवाल को टाल गईं। उन्होंने कहा, ‘‘अभी आंध्र प्रदेश की सीटों पर उम्मीदवार घोषित नहीं हुए हैं, सभी उम्मीदवारों की घोषणा के बाद ही दिल्ली की स्थिति पर विश्लेषण किया जाएगा।’’सभी पार्टियां अपनी-अपनी दावेदारी पेश कर रही हैं, लेकिन अंतिम निर्णय लगभग 1.2 करोड़ मतदाताओं  को करना है, और इस निर्णय का पता चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद पता चल पाएगा।


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