चुनाव में नेताओं का फेसबुक, ट्विटर पर जोर, व्हाट्स एप्प कमजोर

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Tuesday, April 01, 2014-11:59 PM

नई दिल्ली: इस बार के चुनाव में ज्यादा से ज्यादा नेता अनेक ऑनलाइन नैटवर्किंग प्लेटफार्म के जरिए सामाजिक ताना-बाना बनाने का प्रयास कर रहे हैं जिनमें फेसबुक और ट्विटर का इस्तेमाल तो धड़ल्ले से हो रहा है लेकिन व्हाट्स एप्प का उपयोग अब भी ज्यादा नहीं हो रहा है।

इस बार के लोकसभा चुनावों में बड़ी संख्या में उम्मीदवारों ने पहली बार अनेक सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर मौजूदगी की जानकारी अपने हलफनामों में दी है और फेसबुक, ट्विटर तथा यू-ट्यूब खातों का विवरण दिया है। हालांकि इस समय इंटरनैट पर संदेशों के आदान-प्रदान के सबसे लोकप्रिय माध्यम व्हाट्स एप्प के इस्तेमाल का जिक्र कुछ ही नेताओं ने किया है जिनमें कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय माकन हैं जो नई दिल्ली लोकसभा से पार्टी के उम्मीदवार हैं।

उधर कुछ नेता ऐसे भी हैं जिन्होंने किसी भी सोशल मीडिया खाते का जिक्र नहीं किया है। इनमें सत्तारूढ़ कांग्रेस के 2 युवा तुर्क ज्योतिरादित्य सिंधिया और सचिन पायलट शामिल हैं। अनेक राजनीतिक दल और उनके नेता सोशल मीडिया के माध्यम से मतदाताओं को लुभाने में लगे हुए हैं और गूगल, फेसबुक तथा ट्विटर जैसी दिग्गज इंटरनैट कंपनियां इस बार के लोकसभा चुनावों में डिजीटल क्षेत्र में खर्च के करीब 500 करोड़ रुपए का बड़ा हिस्सा कमा सकती हैं।

नरेंद्र मोदी से लेकर अरविंद केजरीवाल तक सभी नेता व्यापक तौर पर सोशल मीडिया पर अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं लेकिन सोनिया गांधी और राहुल गांधी जैसे नेताओं की इस मंच पर किसी तरह की उपस्थिति नहीं है। लाल कृष्ण अडवानी और अरुण जेतली जैसे बड़े भाजपा नेता लगातार ब्लॉग लिख रहे हैं।


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