मिलकर सुलझाएं आपसी विवाद: हाईकोर्ट

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Saturday, April 05, 2014-3:58 PM

 नई दिल्ली: पिछले 14 साल से जोरबाग इलाके में कर्बला की जमीन को लेकर चल रहे विवाद के मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि सभी पक्ष आपस में मिलकर इस मामले को बातचीत से सुलझा लें। 

न्यायमूर्ति मनमोहन की खंडपीठ ने सभी पक्षकारों से कहा है कि वह आपस में मिलकर एक बैठक करें, जिसमें इस मामले को सुलझा लिया जाए। इसी तरीके से इस विवाद को जल्दी से निपटाया जा सकता है।

बैठक में जो फैसला लिया गया कि उसके बारे में एक रिपोर्ट दायर करके अदालत को सूचित किया जाए। अब इस मामले में 22 अप्रैल को सुनवाई होगी।

दिल्ली पुलिस की ओर से ए.एस.जी. सिद्धार्थ लूथरा ने अदालत को बताया कि 31 मार्च को कर्बला जमीन पर हुए विवाद मेंं एक डी.सी.पी. और 300 पुलिसकर्मी घायल हो गए थे।

दिल्ली पुलिस की इन दलीलों को सुनने के बाद ही न्यायालय ने कहा कि मामले को आपस में बातचीत करके सुलझा लिया जाए। अदालत ने कहा है कि अंजूमन ए हैदरी जमीन पर बनी नर्सरी के संचालक के साथ एक बैठक कर विवाद को सुलझाने का प्रयास करें।

गौरतलब है कि कर्बला जमीन विवाद को लेकर न्यायालय में एक मामला विचाराधीन है। इस मामले में जमीन से सटी बी.के. दत्त कालोनीवासी, अंजूमन ए हैदरी और जमीन पर बनी नर्सरी का संचालक पक्षकार हैं।

आखिर क्या है पूरा मामला

लोधी कॉलोनी का बेहद पॉश इलाका जोरबाग में प्राइम लोकेशन पर सड़क किनारे कर्बला की जमीन है। जो करीब 8-10 एकड़ हैं । यह मैदान चारों तरफ से मोटी दीवारों से घिरा हुआ है।

पुलिस का कहना है कि यह जमीन दिल्ली वक्फ बोर्ड की है और बोर्ड की तरफ से इस जमीन पर अंजूमन-ए-हैदरी का कब्जा है। इस जमीन के एक हिस्से में नर्सरी है।

अंजूमन-ए-हैदरी ने सन् 1976 में अब्दुल मुईद खान को कर्बला मैदान की अढ़ाई एकड़ जमीन नर्सरी खोलने के लिए दी थी। सन् 2000 तक नर्सरी का किराया 2 लाख रुपए था।

जब इस नर्सरी का किराया बढ़ाकर 4 लाख रुपए किया गया तो विवाद शुरू हो गया। अब यह मामला 2 समुदायों का बन चुका है। पिछले 14 साल से यहां पर इस जमीन को लेकर झगड़े चल रहे हैं, जिस कारण यहां पर 24 घंटे पुलिस की 2 कंपनी फोर्स तैनात कर रखी है। 


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