दिल्ली में भोजपुरी भाषा भी मुद्दा बनकर उभरी

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Sunday, April 06, 2014-11:07 AM

नई दिल्ली(सतेन्द्र त्रिपाठी): लोकसभा चुनाव में इस बार भोजपुरी भाषा के सम्मान का मामला भी एक मुद्दा बन गया है। दिल्ली में रहने वाले लगभग 50 लाख पूर्वांचल के लोगों को लुभाने के लिए कांग्रेस व भाजपा जुट गई है। इसी कड़ी में भोजपुरी को संवैधानिक दर्जा दिलाने का मामला भी तूल पकड़ रहा है।

भाजपा उत्तर पूर्वी दिल्ली संसदीय सीट के प्रत्याशी मनोज तिवारी ने कहा है कि वह भोजपुरी को उसका सम्मान दिलाएंगे। पूर्व में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने ही मैथिली भाषा को सम्मान दिलाया था। उनके इस बयान पर भोजपुरी समाज दिल्ली सहित विभिन्न पूर्वांचली संगठनों ने मनोज को समर्थन करने का ऐलान कर दिया है। इधर पश्चिमी दिल्ली से कांग्रेस के महाबल मिश्रा भी पूर्वांचल के लोगों के सम्मान की लड़ाई लडऩे का दावा कर रहे हैं। दिल्ली में बसे पूर्वांचली मतदाता दिल्ली की कुल 7 लोकसभा सीटों में से 27 विधानसभा क्षेत्रों में अपना दबदबा रखते हैं।

भाजपा की ओर से ही कराए गए सर्वेक्षणों में किए गए दावों को मानें तो 7 में से 27 विधानसभा क्षेत्र ऐसे हैं जिनमें पूर्वांचली मतदाता 20 से 38 प्रतिशत तक हैं। सर्वे के अनुसार पूर्वी दिल्ली के 13 विधानसभा क्षेत्रों में पूर्वांचली मतदाताओं का दबदबा है तो पश्चिमी दिल्ली के 5 विधानसभा क्षेत्रों में इनकी स्थिति काफी मजबूत है।

इसी तरह उत्तरी दिल्ली के 5 विधानसभा और दक्षिणी दिल्ली के 4 विधानसभा क्षेत्रों में पूर्वांचली मतदाताओं का मत प्रतिशत 24 से 31 प्रतिशत तक है। साफ  है कि यदि प्रवासी मतदाता किसी एक पार्टी के समर्थन में खड़े हो जाएंगे तो लोकसभा में किसी भी उम्मीदवार के लिए जीत की राह बेहद आसान हो जाएगी।


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