<

जब मुलायम प्रधानमंत्री बनते-बनते रह गए...

  • जब मुलायम प्रधानमंत्री बनते-बनते रह गए...
You Are HereNational
Sunday, April 06, 2014-3:32 PM

नई दिल्ली: समाजवादी पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव 1990 के दशक के अंत में प्रधानमंत्री की कुर्सी के करीब पहुंच गये थे लेकिन राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव के टंगडी मारने के कारण उनकी यह आकांक्षा पूरी न हो सकी। उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री ओमप्रकाश श्रीवास्तव ने सद्य प्रकाशित आत्मकथा ‘संघर्ष कदम दर कदम’ में लिखा है कि 1998 के अंत में तत्कालीन वाजपेयी सरकार की उल्टी गिनती शुरू हो गयी थी।

नये लोकसभा चुनाव की आहट मिलते ही पाॢटयों ने लाभ-हानि का लेखा जोखा शुरू कर दिया था। वैकल्पिक सरकार की कोशिशें भी तेज हो गयीं। एक मौके पर ऐसा लगा कि मुलायम प्रधानमंत्री बन जाएंगे। लेकिन ऐन वक्त पर लालू यादव ने टंगडी मार दी जिससे मुलायम प्रधानमंत्री बनते-बनते रह गए। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने अपनी साख डांवाडोल होते देख पोखरन में दूसरा परमाणु विस्फोट किया और शौर्य दिवस जैसे आयोजनों से अपनी गिरती साख को बचाने का प्रयास किया।

लेकिन 1998 के अंत में राजस्थान मध्यप्रदेश और दिल्ली के विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी की बुरी गति हुई। करीब छह दशकों तक प्रांतीय एवं राष्ट्रीय राजनीति के महत्वपूर्ण घटनाक्रमों के गवाह रहे श्रीवास्तव ने आत्मकथा में लिखा है कि भाजपा के अंदर और बाहर यह चर्चा चल पड़ी कि वाजपेयी कमजोर प्रधानमंत्री हैं। उधर जयललिता ने तमिलनाडु में भाजपा के साथ बना मोर्चा तोड़ दिया। बदले राजनीतिक परि²श्य में वैकल्पिक सरकार की कोशिशें तेज हो गयीं।

लेकिन संख्या बल का गणित कुछ ऐसा था कि कांग्रेस के समर्थन के बिना इस तरह की सरकार नहीं बन सकती थी। कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के मौन के कारण ये कोशिशें परवान न चढ़ सकीं और मुलायम प्रधानमंत्री की कुर्सी के करीब पहुंचकर भी सत्ता का शिखर नहीं छू सके।


विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं ? भारत मैट्रीमोनी में  निःशुल्क  रजिस्टर  करें !

Recommended For You