मोदी के प्रधानमंत्री बनने पर बुद्धिजीवियों ने जताई चिंता

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Monday, April 07, 2014-9:28 PM

नई दिल्ली: करीब 100 प्रख्यात नागरिकों ने नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने की संभावना पर आज चिंता जताई और कहा कि उन्हें एक मजबूत नेता के रूप में बढ़ावा देने के लिए 2002 में मुस्लिमों के नरसंहार में उनकी ‘‘बदनाम भूमिका’’ की अनदेखी की जा रही है। मोदी की कड़ी आलोना करते हुए उन्होंने कहा कि मीडिया की चकाचौंध के जरिए लोगों को इस बात के लिए संतुष्ट किया जा रहा है कि मोदी वह व्यक्ति हैं जिसे देश की जरूरत है। उन्होंने मोदी के प्रधानमंत्री बनने पर देश में कट्टरता एवं सांप्रदायिक विभाजन की आशंका जताई।

ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित प्रख्यात लेखक यू आर अनंतमूर्ति द्वारा जारी एक बयान के अनुसार ‘‘भारत में जल्द ही आम चुनाव होने जा रहे है। हम हस्ताक्षरकर्ता भारत के लोगों को कट्टरता, सांप्रदायिक विभाजन तथा देश के लोगों के वर्गों के प्रति हिंसा एवं घृणा के बढ़ते खतरे के प्रति आगाह करना चाहते हैं।’’ कवि अशोक वाजपेयी और योजना आयोग सैयदा हमीद भी इस अवसर पर मीडिया के साथ परिसंवाद के दौरान मौजूद थे।

बुद्धिजीवियों ने कहा कि ‘कार्पोरेट मीडिया अभियान’ ने भाजपा को ‘‘गुजरात के ताकतवर नेता’’ के पक्ष में समर्पण को मजबूर कर दिया है। उन्होंने कहा, ‘‘2002 में राज्य में मुस्लिमों के नरसंहार में मोदी की बदनाम भूमिका को दरकिनार किया जा रहा है तथा उन्हें इस तरह से पेश किया जा रहा है मानो वह देश का नेतृत्व करने के लिए नैतिक रूप से उपयुक्त हैं।’’

बयान में कहा गया, ‘‘गलत सांख्यिकी आंकड़े, कई अद्र्धसत्य का इस्तेमाल कर गुजरात माडल को इस तरह से पेश किया जा है कि उंचे आर्थिक विकास के लिए इसे पूरे भारत में लागू किया जाना चाहिए।’’ इस पर हस्ताक्षर करने वालों में मधु प्रसाद, मिहिर पांडेय, के सच्चिदानंदन, एस इरफान हबीब, सानिया हाशमी, तनवीर अख्तर, नीलम मानसिंह, रजा हैदर, नीलम मानसिंह, मृणालिनी मुखर्जी, मोहसिन खान, प्रभात पटनायक, निखिल कुमार, रमेश दीक्षित, गीता कपूर, के अशोक राव, जावेद अख्तर खान, डी एन झा, अनिल कुमार सिन्हा, अनुराधा कपूर एवं एम के रैना शामिल हैं।


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