पहली बार जनसभाओं से दूर रहे प्रधानमंत्री

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Tuesday, April 08, 2014-2:14 PM
नई दिल्ली(अशोक शर्मा): 16वीं लोकसभा के लिए हो रहे आम चुनाव में भाजपा ने जहां मजबूत भारत बनाने का नारा दिया है। वहीं क ांग्रेस में इसे कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के युग के शुरूआत के तौर पर देखा जा रहा है लेकिन यह पहला मौका है कि प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह चुनाव प्रचार से तटस्थ बने हुए हैं। 
 
गत लोकसभा के चुनाव में भाजपा की ओर से पार्टी के शीर्ष नेता लाल कृष्ण अडवानी को एक मजबूत नेता बताते हुए उन्हें प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया था जबकि भाजपा ने प्रधानमंत्री बनकर 5 साल का अपना कार्यकाल पूरा करने वाले डा. मनमोहन को मजबूर प्रधानमंत्री बताया था।
 
याद रहे कि गत वर्ष हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी की ओर से तैयार की गई रणनीति के तहत प्रधानमंत्री की एक रैली पश्चिमी दिल्ली के तिलक नगर इलाके में कराने की घोषणा की गई थी। उसके आयोजन के लिए पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा तैयारियां तक की गईं थीं लेकिन दो दिन पहले ही उस रैली को रद्द करने की घोषणा कर दी गई। कार्यकर्ता ही नहीं बल्कि स्थानीय नेता तक पशोपेश में पड़ गए थे कि आखिर हुआ तो क्या हुआ।
 
 सूत्रों की माने तो यह संभावना व्यक्त की जा रही थी कि लोकसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री दिल्ली में चुनावी रैलियों को सम्बोधित करेंगे, लेकिन ऐसा न हो सका।
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 इससे सिख मतदाताओं में भी चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
 
 उनका मानना है कि गत पांच साल के दौरान जितने भी घोटालों के मामले प्रकाश में आए, उनमें से एक भी मामले में प्रधानमंत्री के ऊपर आंच तक नहीं आई। इसके बावजूद आखिर किस आधार पर प्रधानमंत्री को पार्टी ने चुनाव प्रचार से दूर रखा है। 
खास बात यह है कि पश्चिमी दिल्ली संसदीय सीट पर सिख मतदाता खासी संख्या में हैं, जो पहले कांग्रेस का वोट बैंक माने जाते थे। लेकिन इस बार उनके रू ख में काफी परिवर्तन आता दिख रहा है। वैसे भी आप ने इस सीट पर एक सिख पत्रकार को ही उम्मीदवार बनाकर मैदान में उतार रखा है। देखना है कि इस बात ऊंट किस करवट बैठता है।

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