बर्थडे के दिन ही मिली मौत

Edited By ,Updated: 30 Jul, 2015 06:41 AM

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कुदरत की महिमा को कौन पहचान पाया है। जीना-मरना सब उसी के हाथ है। 1993 के मुंबई बम धमाकों के दोषी याकूब अब्दुल रज्जाक मेमन को उसके बर्थडे के दिन ही मौत की सजा मिली।

नई दिल्लीः कुदरत की महिमा को कौन पहचान पाया है। जीना-मरना सब उसी के हाथ है। 1993 के मुंबई बम धमाकों के दोषी याकूब अब्दुल रज्जाक मेमन को उसके बर्थडे के दिन ही  मौत की सजा मिली। 

मेमन का जन्म 30 जुलाई 1962 को मुंबई में हुआ था।  बर्थडे का खुलासा उसके पासपोर्ट से हुआ है। यह संयोग है कि जिस दिन उसने इस दुनिया में कदम रखा था, उसी तारीख और उसी महीने में उसे फांसी की सजा मिली। वर्ष 2007 में स्पेशल टाडा कोर्ट ने याकूब मेमन को दोषी पाते हुए सजा सुनाई थी। 

इस फैसले के खिलाफ उसने हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट और फिर राष्ट्रपति के पास अपील की, लेकिन हर जगह उसकी अपील खारिज कर दी गई। सजा पर रोक के लिए उसने सुप्रीम कोर्ट में एक और याचिका डाली वो भी खारिज हो गई। अंत तक कोशिश करने के बावजूद मेमन को सजा माफ नहीं हुई ,शायद इसलिए क्योंकि खुदा ने उसकी मौत की यहीं तारीक मुकर्रर की थी।

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