‘देश को खोखला कर रहा है भ्रष्टाचार’

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Friday, April 21, 2017-12:44 AM

केंद्रीय सतर्कता आयोग की संसद में पेश नवीनतम रिपोर्ट में बताया गया है कि इसे 2015 की तुलना में 2016 में भ्रष्टाचार की 67 प्रतिशत अधिक शिकायतें प्राप्त हुईं। स्वतंत्रता के समय से ही देश में ‘भ्रष्टाचार का महारोग’ इस कदर जड़ें जमा चुका है कि इसे रोकने के सरकार के प्रयासों के बावजूद कोई दिन ऐसा नहीं गुजरता जब सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के भ्रष्टाचार के समाचार न आते हों। चंद ताजा उदाहरण निम्र में दर्ज हैं :

21 मार्च को मानसा में विजीलैंस विभाग ने पंजाब जल स्रोत प्रबंधन विकास निगम मानसा के कार्यकारी इंजीनियर सुरेश कुमार गोयल को एक ठेकेदार से 1.48 लाख रुपए का रिश्वत का चैक लेते हुए गिरफ्तार किया। बाद में उसके ब्रीफकेस की तलाशी के दौरान 4.31 लाख रुपए तथा 25.61 लाख रुपए उसके घर से बरामद किए गए।

25 मार्च को संगरूर में ‘टल्लेवाल’ पुलिस थाने के 2 एस.आई. गुरतेज सिंह व जरनैल सिंह एक शराब तस्कर से उसका केस रफा-दफा करने के बदले में 15,000 रुपए रिश्वत लेने के आरोप में निलंबित किए गए।

4 अप्रैल को राजस्थान में कोटा जेल के जेलर ‘बत्ती लाल मीणा’ को 12,500 रुपए रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया। उसके आवास से भी महंगे उपहार, नकद रुपए, गहने और महंगी शराब की बोतलें बरामद की गईं। वह सुविधाएं उपलब्ध करवाने के बदले में कैदियों के परिजनों से रिश्वत वसूल करता था।

4 अप्रैल को ही केंद्रीय जांच ब्यूरो के अधिकारियों ने नई दिल्ली में आयकर विभाग के एक निरीक्षक को 5 लाख रुपए रिश्वत लेते हुए पकड़ा। 5 अप्रैल को कुरुक्षेत्र के मुर्तजापुर गांव के एक 21 वर्षीय युवक ने पंखे से लटक कर आत्महत्या का प्रयास किया। उसने होमगार्ड में भर्ती के लिए ट्रेङ्क्षनग पूरी कर ली थी परंतु संबंधित अधिकारी ने ड्यूटी देने के बदले में उससे 10,000 रुपए की मांग की थी जो वह नहीं दे पाया।

6 अप्रैल को दयालपुरा पुलिस थाने के ए.एस.आई. सुखदेव सिंह को हमीरगढ़ गांव में पोस्त की खेती के सिलसिले में पकड़े गए एक व्यक्ति से 10,000 रुपए रिश्वत लेने व जब्तशुदा पोस्त नष्ट करने के आरोप में पकड़ा गया। 7 अप्रैल को भरतपुर में सी.बी.आई. ने 60 लाख रुपए का बिल पास करने के एवज में ठेकेदार से 1 लाख रुपए रिश्वत लेते हुए बी.एस.एन.एल. के महाप्रबंधक राजेश कुमार बांसल को एक दलाल के साथ गिरफ्तार किया।

7 अप्रैल को रोहतास  (बिहार)  जिले के लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (पी.एच.ई.डी.) के खजांची शारदा चौधरी को एक बिल का भुगतान करने के बदले में 27,000 रुपए रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। 7 अप्रैल को ही नारनौल सतर्कता विभाग की टीम के सदस्यों ने ग्राम विकास कार्यों का चैक जारी करने की एवज में राजपुरा के ग्राम सचिव आकाश शर्मा को 10,000 रुपए रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा।

14 अप्रैल को कर्नाटक के बेंगलूरू में पूर्व नगर सेवक वी. नागराज के घर छापेमारी में 40 करोड़ रुपए की बेहिसाबी रकम जब्त की गई।18 अप्रैल को संगरूर पुलिस ने 2 सहायक सब-इंस्पैक्टरों बलजिंद्र सिंह चट्ठा और बलकार सिंह के विरुद्ध कथित रूप से 5 किलो अफीम के साथ गिरफ्तार किए गए राजस्थान पुलिस के एक कांस्टेबल के परिवार से 2.5 लाख रुपए की जब्री वसूली करने के आरोप में केस दर्ज किया।

19 अप्रैल को सी.बी.आई. ने पुणे के निकट खडकी स्थित ‘इंडियन आर्डनैंस फैक्टरी बोर्ड’ के अंतर्गत संचालित  शस्त्रास्त्र कारखाने (ए.एफ.के.) के जूनियर वक्र्स मैनेजर के विरुद्ध 2010 से 2016 के बीच शस्त्रास्त्र व्यापारियों से 32.67 लाख रुपए रिश्वत लेने के आरोप में केस दर्ज किया।19 अप्रैल को आयकर विभाग ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के 4 उच्चाधिकारियों के यहां छापे मार कर 20 करोड़ रुपए जब्त किए।19 अप्रैल को ही मानसा में विजीलैस विभाग ने सेल टैक्स इंस्पैक्टर भूपेंद्र सिंह को एक आयरन स्टोर के मालिक से 6000 रुपए रिश्वत लेते हुए पकड़ा।

उक्त उदाहरणों से स्पष्टï है कि देश में दशकों से बढ़ रही भ्रष्टाचार रूपी विष बेल पहले की भांति ही फल-फूल रही है तथा आज एक आम आदमी के लिए बिना रिश्वत दिए कोई काम करवाना कितना मुश्किल हो गया है। सर्वाधिक बुरी बात यह है कि पुलिस व आयकर आदि जिन विभागों पर भ्रष्टाचार रोकने की बड़ी जिम्मेदारी है, उनका स्टाफ भी इस अनैतिक धंधे में पूर्णत: शामिल है अत: इस पर अंकुश लगाने के लिए सरकार को इस समस्या पर गम्भीरतापूर्वक ध्यान देकर दोषियों के विरुद्ध त्वरित एवं कठोर कार्रवाई करनी चाहिए।                                    —विजय कुमार 


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