सादा जीवन, सादा भोजन है लंबी उम्र का राज : सूबेदार इंद्र सिंह

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Monday, December 22, 2014-8:42 AM

100 वर्षीय सूबेदार इंद्र सिंह जी की लम्बी उम्र का राज है अपना काम अपने हाथों करना, थोड़ा और शाकाहारी भोजन करना तथा खुद को व्यस्त रखना। वह 2 बार सेना के पैंशनर रह चुके हैं। वह 1935 में अंग्रेजी शासन के वक्त पहली बार फौज में भर्ती हुए और 1959 मेें रिटायर हुए। उन्होंने एक बार फिर मिलिट्री ज्वाइन की और 1975 में दोबारा पैंशनर बनें। वह जालन्धर छावनी के रहने वाले हैं और उनके पांच पुत्र (जिनमें से एक का गत दिवस देहांत हो गया था) तथा दो पुत्रियां हैं। उनके परिवार में पौत्र, नाती, पड़पौत्र तथा पडऩाती तक हैं।

उन्होंने बताया कि वह इतने भरपूर परिवार के होते हुए भी वह अकेले रहते हैं। उनकी पत्नी चार वर्ष पहले उनका साथ छोड़ गई थी। सूबेदार जी ने किसी पुत्र के साथ रहने की बजाय खुद ही अपनी जिम्मेदारी उठा ली। हालांकि सभी पुत्रों को उन्होंने खुद घर बनवा कर दिए। वह कहते हैं कि वह किसी पर बोझ नहीं बनना चाहते। वह अपना सारा काम खुद कर सकते हैं।

सूबेदार इंद्र सिंह के साथ आए उनके पौत्र परमिन्द्र सिंह ने बताया कि वह सुबह नहा-धोकर पाठ करने के उपरांत खुद चाय बना कर पीते हैं। उर्दू में हिंद समाचार तथा अंग्रेजी-पंजाबी की अखबारें पढ़ते हैं। फिर सब्जी खुद ही तैयार करते हैं और नजदीक ही एक घर में रहते उनके एक पुत्र के घर से उनके लिए रोटी तैयार होकर आ जाती है। वह दिन में एक बार ही भोजन करते हैं और रात को दूध पीते हैं। उनका कहना है कि वह सारी उम्र शाकाहारी तथा नशों से दूर रहे हैं।

उन्हें ऊंचा सुनाई देता है परन्तु उनकी याददाश्त बहुत तेज है। वह कहते हैं कि जिंदगी में उन्होंने कभी किसी चीज की लालसा नहीं रखी। यहां तक कि वह अपने पुत्र और पौत्रों से भी कोई मदद नहीं लेना चाहते। उन्होंने हाल ही में चीफ मिनिस्टर रिलीफ फंड (जम्मू-कश्मीर) के लिए एक लाख रुपए का योगदान दिया। इससे पहले भी वह उत्तराखंड रिलीफ फंड के लिए 51 हजार रुपए दे चुके हैं। उन्होंने अपनी जिंदगी को बहुत ही सादगी के साथ जिया है और यही उनकी लम्बी उम्र का राज है।

—कुलदीप सिंह बेदी


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