आपका मन भी ध्यान में नहीं रमता तो पढ़ें यह कहानी

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Wednesday, December 24, 2014-11:42 AM

संसारिक व्यक्ति यह शिकायत करता है की उसका मन ध्यान में नहीं लगता राग द्वेष युक्त आत्मा संसारिक वस्तुओं और विषय के ध्यान में मस्त व मग्न रहती हैं। विषयों में संसारिक मनुष्य का मन बहुत जल्द रमता है।

लोग ताश खेलने में अपने आप को खो देते हैं रात भर थकते नहीं। नाच-गाने में लोगों का ध्यान खूब रमता है। धन कमाने में लोग दिन-रात परिश्रम करते रहते हैं और अपने धन की रक्षा करते हुए बड़े चौकस रहते हैं। इस प्रकार के ध्यान में संसारिक मनुष्य व्यस्त एवं अभ्यस्त हैं बल्कि वो संन्यासियों से भी ज्यादा ध्यान में लीन हो जाता है। पौराणिक कथा से जानें ध्यान क्या है

साधक साधना में लीन था और एक कामुक स्त्री अपने प्रियतम से मिलने जा रही थी। प्रियतम में खोई हुई थी की अचानक से उसका पैर साधक को लग गया। साधक ने कामुक स्त्री को क्रोध भरे स्वर में कहा,"अंधी हो क्या देख कर नहीं चल सकती।"

कामुक स्त्री ने कहा," तुम क्या ईष्ट का ध्यान कर रहे हो? साधना में मग्न हो? क्या तुम्हें अपने शरीर की सुध-बुध है। मुझे देखो मैंने अपने प्रियतम के प्रेम में अपनी सुध- बुध भी खोई हुई है।"

संसारिक व्यक्ति एक विषय में इतना व्यस्त व ध्यान सक्त हो जाता है की अपनी सुध-बुध खो बैठता है। इस प्रकार के ध्यान में संसारी लोग अभयस्त हैं और इन संसारिक विषयों में ही उनका मन टिकता है। एकाग्र होता है। वह इतना एकाग्र होता है की शायद किसी संयासी का भी न होता हो। यही बंधन है। इस से पार पाकर ही मन को ध्यान में एकाग्रचीत किया जा सकता है।

- सरोज बाला


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